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Showing posts from October, 2017

वो बुढ़िया

                                 आज स्कूल जाते वक्त दोनों बच्चे एलान कर गए थे - ' पापा ऑफिस से जल्दी आ जाना , डिनर बाहर करेंगे । ' काफी दिनों से साथ में बाहर घूमने भी नहीं गए थे । घड़ी की सुइयों के साथ बंधी दिनचर्या से कुछ नीरसता - सी आ गयी है । शाम के छह बज गए हैं । घर जल्दी पहुंचना है , आज बस की कतार में नहीं लगूंगा । मैंने टैक्सी रोकी और बैठ गया । सोचने लगा- '  रोज 20 रुपये लगाकर एक घंटे में घर पहुँचता था , आज 150 रुपये खर्च कर रहा हूँ । जल्दी पहुँच भी तो जाऊँगा । ' लाल बत्ती पर टैक्सी रुकी , मोगरे की वेणियाँ हाथ में लिए एक लड़की टैक्सी की खिड़की के पास खड़ी हो गयी । याद हो आया - पहले मैं श्यामा के लिए कई बार वेणी ले जाया करता था , पर अब बातें भूली बिसरी-सी हो गई । मैंने उस लड़की को ३० रुपये दिए और एक वेणी ले ली ।                                   घर पहुंचा - बच्चे तैयार ही थे और श्यामा भी । गजरा देख कर श्यामा मुस्...