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Showing posts from February, 2017

थामे हैं हाथ

आज ही की पावन बेला में थामे थे हाथ , सुख -दुःख में मिलकर चले साथ-साथ | प्रेम और विश्वास है भरपूर कमाया , जन्नत - सा घर मिल कर बनाया | खुश हैं जिन्दगी में जो कुछ मिला , जो न मिला , ना है इसका गिला | जीवन में रिश्तों का भण्डार मिला , कुहासे के बीच आशाओं का अम्बार मिला | बुजुर्गों के आशीष की सम्पदा मिली , बच्चों का प्यार , सहयोग अपार मिला | रिश्तों में रिश्ते यूँ ही फलते  रहे , हम पीढ़ियों - बीच सेतु बने रहें | रुठते-मनाते हम यूँ ही चलते जाएँ , बन संबल एक दूजे का साथ निभाए |

याचना

                                       दाताराम को दोस्त नंदराम के बीमार  होने की खबर मिली , वह उनके हालचाल लेने के लिए उसके घर की ओर मुड़ गया | रास्ते भर वह सोचता रहा कि नंदराम तो बहुत हृष्ट -पुष्ट और खुश मिजाज इंसान है , फिर बीमार कैसे हो गया | नंदराम के घर पहुँचने पर देखा - उसके सिरहाने काफी दवाइयां रखी हैं | दाताराम बहुत सहम गया | अनुमान लगाया -' काफी खर्चा हुआ होगा !' नंदराम ने बताया - " मैं अचानक मूर्छित हो गया | पूरे शरीर की जाँच हुई | डॉक्टर ने बताया - मस्तिष्क में खून का थक्का जम गया है | " दाताराम मन ही मन बुदबुदाने लगा - ' एक  बिमारी का इतना खर्चा ? '                                        दाताराम के पास जरुरत से ज्यादा धन है , परन्तु धन-लोलुपता अब भी बरकरार है | कंजूसी उसके स्वभाव में है | ' मोटा खाओ - मोटा पहनो ' का सिद्धांत दाताराम ने अपने जीवन में ही नहीं , पूरे घर ...

पब की दुनिया

                                          कई वर्षों से अमेरिका में रह रहे सुरेखा और सुजीत सभी सुख - साधनों - सम्पदा से तराबोर हैं | फिर भी  समृद्ध जीवन के बीच कहीं एकाकीपन तो है ही , रिश्ते - नाते , सम्बन्धी अपने सभी भारत में हैं , सो दूर हो गए | एक बेटी है -उर्वशी | एक दिन सुजीत के मन में विचार आया - ' किसी कारणवश हमें भारत लौटना पड़ा , तो उर्वशी कैसे एडजस्ट हो पाएगी ? ' यही सोचते हुए उर्वशी की स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद कॉलेज के लिए भारत में ही पढ़ाना उचित समझा | दिल्ली के नामी कॉलेज में नाम लिखा कर , रहने की व्यवस्था सुचारू रूप से करके दोनों अमेरिका लौट गए | फ़ोन , व्हाट्स अप और मेल द्वारा उर्वशी से संपर्क बनाए रखा |                                             लगभग छः माह बाद सुरेखा को बेटी को देखने की लालसा हुई और उर्वशी को बताए बिना भारत आ गई , उसके रूम पहुँच गई ...

लो , आ गया मधुमास

बीती वे लम्बी काली रातें ,         लो आ गया मधुमास | देखो , इन्द्रधनुषी हुआ ,         कुदरत का कैनवास | नवकोपलों से सजे ,         द्रुम डालियों के दल | अमवा भी बोराई,        बूढ़े वट पर चढ़ा यौवन बल | लम्बी ख़ामोशी के बाद ,        सुनी पक्षियों की चहचहाहट | ठिठुरन का हुआ अंत ,         आई गर्मियों की चुनचुनाहट | छितराए बादलों के बीच ,         चली ठंडी बयार | प्रफुल्ल है आमजन ,         ख़ुशी बढ़ाते आए त्यौहार | प्रभु की ही इनायत है ,         चहुँ ओर छा गया वसंत | हम रहे सदा हँस-मिल-जुल ,         जीवन में भी सदा रहे वसंत |

पाप या पुण्य

                                                          भगवती चरण वर्मा की कहानी ' प्रायश्चित ' हम सभी ने पढ़ी है |  लाला घासीराम की पतोहू , रामू की बहू के हाथों कबरी बिल्ली की हत्या - ब्रह्म मुहूर्त में हत्या अर्थात् घोर पाप | पंडित परमसुख का कहा जाना - ' यह तो नरक का विधान है ' - घर के सभी सदस्यों को मानसिक तनाव में डाल देता है | अगला जन्म नारकीय न हो , पंडित जी इसका मार्ग भी निकाल लेते हैं - ग्यारह तोले की सोने की बिल्ली और मनो अनाज का दान , साथ ही ब्राह्मणों का भोज | पूरी योजना कागज़ पर उतारी गई , इस बीच पता चला - बिल्ली उठ कर भाग गई |                                                             आज ऐसी ही स्थिति मेरे एक परिचित के पड़ोसी की है | इन्हें किसी पंडित या भविष्यवक्ता द्वारा सुझा...