आज घर में जोर शोर से तैयारी चल रही है। आज फिर रीमा को देखने लड़का आ रहा है। यह कोई पहली बार तो है नहीं। कई बार लड़के आए, देख गए। एक बार तो रिश्ता तय हो गया था, पर सच्चाई से परिचित कराते ही रिश्ता टूट गया। रीमा सोचती है- पहली मुलाकात में ही सत्य से अवगत करा दें, तो ऐसी नौबत ही न आए। उसका खुद का दृष्टिकोण स्पष्ट है। रीमा विवाह को अनिवार्य नहीं मानती है, पर माता-पिता मानते हैं, तो प्रयत्न जारी है। एक बार रीमा ने माँ से पूछा था- "आप लोगो ने मुझे एम ए, बी एड करा दिया। क्या विवाह करना जरूरी है?" माँ का जवाब था- "हर काम का एक वक्त और रिश्ते की एक जरूरत होती है। वह रिश्ता हमारी जिंदगी में न हो तो आज नहीं तो कल हमें इसकी कमी खलती ही है।" बस इसके आगे बोलने की गुंजाइश ही नहीं थी। उनके कहे अनुसार प्रयास जारी है। रीमा ने भी सोच लिया है- वह अपनी एक कमी से हार नहीं मानेगी। आज रोहिणी जीजी भी आई हैं। उन्होंने अख़बार में विज्ञापन पढ़ा था- एक सुशील और गुणी वधू चाहिए। लड़का इकोनॉमिक्स में डॉक्टरेट है और यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है। रोहिणी ने फोन पर पूछ लिया था- 'दह...
मैं उर्मिला, एक गृहिणी, सांसारिक सुख-दुःख , फ़र्ज़-अधिकार, क़र्ज़-हर्ज़ में रमी हुई महिला हूँ | मैंने खुशनुमा जिन्दगी, बच्चों की परवरिश, बच्चों के विवाह सभी पलों को बहुत जी भरकर जिया | जीवन के उतार-चढ़ाव, अनुभव और अनुभूतियों का तीखा, मीठा, कड़वा रसास्वादन भी हुआ पर कहीं मैं इन सब में बंध कर रह गयी | आज अंतरजाल अर्थात् इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को आयाम दे कर स्वयं आज़ाद होना चाहती हूँ- पंखों को खोल कर स्वच्छंद उड़ना चाहती हूँ | उड़ कर देखूँ, पंखों में कितनी ताकत है !