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Showing posts from December, 2016

कोहरा

यह कैसा तिलिस्म - सा लगता है कोहरे में सब धुंधला ही लगता है | घनघोर कोहरा सोख रहा है रोशनी , सूरज भी तलाश रहा पृथ्वी अपनी | स्तब्ध -मौन है चहुँ ओर का शोर , तन्हाई भरी लम्बी रातों का भोर | नुक्कड़ - नुक्कड़  पे अलाव हैं सुलगते , चरम सुख मिलता है जब चाय हैं सुबड़ते | रोशनदान पर बैठा कबूतर रहा ठिठुर , गर्दन दबा , भूला गुटुर - गुटुर | रगड़ कर हम गर्मास दे रहे हथेलियों को , हथेली से ही ताप रहे चेहरे को | कल दिख रहा था मंदिर का झंडा , आज नहीं दिखा चौबारे का खम्भा | धुंध में राह पार करना नहीं होता आसान , एक-एक पग चलने पर हो जाता भान| जीवन में छाए कोहरे को भी मिटाना होगा , तन्हाई , अवसादों को दूर भगाना होगा | एक चाह- हर पल हो उल्लासों का मेला , जीवनं में नहीं रहे कोई अकेला |

मन के रंग

                                            हर 2 मिनट में मेरी निगाहें घड़ी पर पहुँच जाती , आज सुबह के 10 बज गए | स्मिता और संगीता दोनों बेटियाँ कॉलेज चली गई और श्रीमान दफ्तर चले गए , पर मीना का कोई अता-पता नहीं | रोज सुबह 9 बजे आ जाती थी - कहीं आशा बीमार तो नहीं हो गई | कल ऐसा लगा तो नहीं ! दरअसल मुझे मीना से ज्यादा आशा का इन्तजार होने लगा है | मीना - मेरे घर के भीतर के काम सँभालने वाली परिचारिका और आशा - उसकी चार वर्षीया बेटी | रोज मीना आशा के साथ सुबह 9 बजे आ जाती और शाम 4 बजे लौट जाती | इस बीच घर की साफ - सफाई , खाना बनाना ,घर के सारे काम संभल लेती और आशा मेरे इर्द - गिर्द ही घूमती रहती | 6 महीने हो गए  - इसकी मीठी बातें और हंसी से मेरा दिन का एकाकीपन भर - सा गया | इससे लगाव भी हो गया , इसलिए इन्तजार रहता है |                                              घ...

हमारी छुक-छुक रेल

                                                         गर्मी की छुट्टियों में बड़ा इंतजार रहता था - नानी के कब जायेंगे?  यह इन्तजार नानी के यहाँ जाने का इतना नहीं , जितना इन्तजार रहता था - ट्रेन में 24 घंटे का सफ़र तय करने का | पूरे रास्ते गुड़ की मीठी पूरी , नमकीन पूरी , अचार का स्वाद , कॉमिक्स पढने का मजा , आस - पड़ोस के यात्रियों से गपियाते , खिड़की से बाहर दृश्यों को ताकते --इन सब का अलग ही आनंद था | उस समय सफर में इत्मीनान था , सुकून था, पर अब वो कहाँ ?                                                           पिछले माह हुई रेल - दुर्घटना ने तो हमें डरा ही दिया | ट्रेन में गड़बड़ी का अंदेशा लोको - पायलट द्वारा देने पर भी अनदेखा कर दिया गया | सोचो तो ड्राइवर के कहने पर ट्रेन को रोक लेते -सभी यात्...