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Showing posts from August, 2023

परफेक्ट मदर

           कल माँ जी (मेरी सास) के पास उनकी एक शुभचिंतक सहेली आई। बातों- बातों में कह गई- 'मेरी बहू से अपने बच्चे ना संभलते।' माँ जी ने कह दिया- 'तो तुम थोड़ा सहारा लगा दिया करो।' बात वही खत्म हो गई। अपने बच्चे ना संभलते- कहने का तातपर्य यही कि वह एक जिम्मेदार माँ नहीं है। क्या अपनों से सर्टिफिकेट की जरूरत है? किसे अधिकार है यह तय करने का कि फलां महिला अच्छी माँ है या नहीं।            आज एक फ़िल्म देखी- 'मिसेस चटर्जी वर्सेज नॉर्वे'। यह एक सत्य घटना पर आधारित है। नॉर्वे में रह रहा भारतीय परिवार नॉर्वे के तौर तरीकों और कानून से अनभिज्ञ था। एक भारतीय माँ अपने बच्चे को गलती करने पर पिटती है- जिसे अत्याचार माना गया। दाल चावल चम्मच की बजाय हाथ से खिलाना पसन्द करती है- जिसे जबरन ठूंसने की उपमा दी गई। कई काम हैं, जिन्हें हर देश की माँ अपने बच्चे के साथ करती है। भारतीय संदर्भ में ये बातें सामान्य लग सकती हैं, लेकिन नॉर्वे में यह कानून का उल्लंघन है, वहाँ चाइल्ड वेलफेयर सर्विस इन मातृ- दुलार का विरोध करती है और ऐसी माँ को अनपरफेक्ट मदर का ...

असली श्रद्धांजलि

          जीवन वैसे ही चल रहा है। रोज के काम नियमित रूप से हो रहे हैं। कमी है तो पापा की। आज 2 तारीख को पापा का उठावना है, शाम को श्रद्धांजलि बैठक रखी गई है। मैं पापा के शौक कभी भूल नहीं सकता! सबेरे गाढ़े दूध की चाय पीना, अखबार किताबें पढ़ना, थोड़ी कसरत करना, नहा कर प्रेस के कपड़े पहनना और सोते समय एक गिलास दूध पीना। वे मुझे हमेशा कहा करते- 'कमाते हो, अच्छा खाओ, अच्छा पिओ, अच्छा पहनो, जीवन स्तर ऊँचा रहे, इसलिए शारीरिक- मानसिक कसरत करते रहो।' सुबह उठते ही मेरे हाथ में अखबार आया, तारीख पर ध्यान गया। मुँह से निकला- "निर्मला, बहुत बड़ी गलती हो गई। दूधवाले काका, प्रेस वाली अम्मा, अखबार वाले भैया को पिछले महीने के रुपये नहीं दिए। अभी तीनों के रुपए निकाल दो। उन्हें फोन करके बुला लेता हूँ।" पास खड़े चाचा जी सुन रहे थे, बोले- "अरे इसमें गलती कैसी? आज उठावना हो जाय फिर हिसाब कर देना।"           "नहीं, चाचाजी। पापा इन तीनों की बहुत इज्जत करते थे। हम दोनों वर्किंग हैं, कई बार हम दोनों को बाहर जाना पड़ता था। गर्मी, सर्दी, बरसात कैसा भी समय रहा हो, ये तीनों ...