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Showing posts from September, 2019

मां की पाती बेटी के नाम

            प्यारी लाडो, सदा खुश रहो। फोन, व्हाट्सअप द्वारा तुमसे संपर्क बना रहता है। फिर भी पत्र लिख रही हूं, जिससे जब-तब तुम मेरे स्पर्श को अनुभव करती रहो। पत्र द्वारा मैं अपने विचार सांझा कर रही हूं, इसे लिखने में मुझे खुशी और इत्मीनान भी महसूस हो रहा है।              जानती हो, मैं एक वकील बनना चाहती थी, पर बन न सकी। आज तुम्हारे द्वारा मैं अपना सपना पूरा होते देख रही हूं। जब घर में पुरानी परम्पराओं और रूढ़ियों के विरोध में तुम मेरे हक और अधिकार के लिए सबसे संघर्ष करती थी, तो तुम्हारी दादी मुस्कराकर कहती- 'यह लड़की वकील ही बनेगी, इससे कोई जीत नहीं सकता।' वकालत करने के बाद समाज के प्रति भी तुम्हारी जिम्म्मेदारी बढ़ जाएगी। आज समाज में बहशी, दरिंदे, भूखे आदमखोरों ने आतंक फैला रखा है, तुम्हें इन्हें दंडित कर नारी का मान-सम्मान बढ़ाना होगा। याद है-पिछले वर्ष दहेज प्रथा से प्रताड़ित होकर पड़ोसी गुप्ताजी की बेटी ने आत्महत्या कर ली थी। हम चाहते हैं-तुम दहेज-प्रथा से उत्पीड़ित व नारकीय जीवन झेल रही महिलाओं को न्याय द...