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Showing posts from February, 2018

नशा

जरूरत नहीं उम्र को ढंक दूँ खिजाब से, रिश्तों की गहराई नापी है मैंने उम्र से। किसी प्याले की कुव्वत कहाँ बहका सके मुझे, धुन है, जज्बा है-प्यार का,जिसने बाँधा मुझे। क्यों कर गुजारें जवानी मयखानों में, खो देते होश-हवास, जब डूब जाते नशे में। परिवार तबाह करता यह जुए का नशा, दीवानगी दिखाती दौलत,शोहरत का नशा। नशा है स्मार्टफोन पर जुटे रहने का, नशा है घंटों बतियाते रहने का । नशा है लोगों के लाइक्स देख हर्षाने का , नशा है चेटिंग का , फ्लेर्टिंग का। रिश्ते का जुनून हो नशा हो प्यार में, धन-मन समर्पित हो , ऐसा नशा हो संसार में, मंदिर-मस्जिद,धर्म-जात के नाम पे न लड़े इंसान, ढोंगी बाबा और नेताओं बंद करो देना अपना ज्ञान।

लघु कथा - बाल मन

4 वर्षीया अंशु ,स्कूल की छुट्टी हो गई है , गेट के पास खड़ी है | आज उसे लेने दादी नहीं आई , मम्मी आई हैं | अंशु को दादी का साथ अच्छा लगता है - न रोक ,न टोक , न कोई बंदिशें , बस फरमाइश ही फरमाइश | प्रायः अंशु सड़क पर पड़े एक पत्थर को जूते से उछालती हुई घर तक ले आती है | कभी नाचती हुई चलती है , कभी पूरे रास्ते स्कूल के किस्से ही सुनाती रहती है , मानो वे दादी नहीं सहेली हों | उसकी बातों पर वे मुस्कराती रहती हैं , परन्तु मम्मा को तो अंशु की शैतानियों पर बहुत गुस्सा आता है , डांटती ही रहती हैं | मम्मी तो हर काम में नियम बना देती हैं , लकीरें खींच देती हैं , उसे पार करना मतलब गुनाहगार | आज तो अंशु को चुपचाप रहना होगा , सीधे-सीधे चलना होगा | अंशु ने पूछा-" मम्मा , आज दादी क्यों नहीं आई ?" " दादी डेंटिस्ट के गई हैं |" उसे याद हो आया, पहले भी एक बार दादी पापा के साथ डेंटिस्ट के गई थी | पापा कह रहे थे -' अम्मा के दांत हिल रहे है ,निकालने ही पड़ेंगे |' अंशु घर घुसी, घर में हलवा बनाने की खुशबू बड़ी अच्छी लग रही है| पिछली बार दादी डेंटिस्ट के गई थी तो मम्मा ने लापसी...