स्वागत तुम्हारा बहू इस घर में, सदा खुश रहो, अपने घर में। नए घर, नए रिश्तों को को थाम, करती रहो, रोशन दो घरों के नाम। नयनों में है तुम्हारे, हजार सपने, यह घर, हम सब हैं तुम्हारे अपने। वादा है, तुमसे चाहे जैसी हो घड़ी, पाओगी सदा मुझे अपने पास खड़ी। बेटी से बहू बन, तुम आई हो, खुशियों की सौगात घर में लाई हो। तुम हो इस कुल की लाज, हंसते - हंसते निभाना रस्मो रिवाज। मेरी ताकत है तुम्हारा हमसफ़र, हंसते मुस्कुराते गुजारो जीवन डगर। तुम भी मेरी ताकत बन जाओ, इस परिवार की कड़ी से जुड़ जाओ। मेरा दामन खुशियों से भर जाएगा, मेरा बेटा बन 'हमसफ़र' साथ निभाएगा। अपने जीवन के सपनों को सच बनाना, अपने घर को सदा 'खुशमय' बनाना।
मैं उर्मिला, एक गृहिणी, सांसारिक सुख-दुःख , फ़र्ज़-अधिकार, क़र्ज़-हर्ज़ में रमी हुई महिला हूँ | मैंने खुशनुमा जिन्दगी, बच्चों की परवरिश, बच्चों के विवाह सभी पलों को बहुत जी भरकर जिया | जीवन के उतार-चढ़ाव, अनुभव और अनुभूतियों का तीखा, मीठा, कड़वा रसास्वादन भी हुआ पर कहीं मैं इन सब में बंध कर रह गयी | आज अंतरजाल अर्थात् इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को आयाम दे कर स्वयं आज़ाद होना चाहती हूँ- पंखों को खोल कर स्वच्छंद उड़ना चाहती हूँ | उड़ कर देखूँ, पंखों में कितनी ताकत है !