मैं मध्यम वर्गीय परिवार का एक साधारण इंसान। मुझे बचपन से ही जरूरत से ज्यादा 'संचय' पसन्द नहीं। खर्च के मामले में मैंने हमेशा जरूरी सामानों को ऊंची फेहरिस्त में रखा। मेरी पत्नी का स्वभाव मुझ से विपरीत तो नहीं कहा जाएगा, पर हाँ, बिल्कुल अलग है। वह आधुनिक विचारों की है। जिसे मैं 'संचय' कहता हूँ, वह स्टेटस को बनाए रखने के लिए उन्हें इकट्ठा करना जरूरी समझती है। काफी दिनों से मैंने कपड़े नहीं खरीदे थे। पत्नी के वाक्य से मैं मुस्करा दिया- " तुम्हारे पास गिनी चुनी शर्ट हैं, जिन के कारण तुम्हें लोग पीछे से ही पहचान जाते हैं। तुम इन कपड़ों से बोर नहीं हुए क्या? कल हम बाजार जाएंगे और आपके लिए 4-5 शर्ट खरीदेंगे।" बड़ी मान मुन्नवत के बाद मैं बाजार जाने को राजी हुआ, पर मैंने अपनी भी एक शर्त रख दी- "सिर्फ तीन शर्ट खरीदूंगा। वे भी ज्यादा महंगी नहीं होनी चाहिए।" मैंने पत्नी की पसंद के रंग और अपनी पसंद के दाम की तीन शर्ट खरीद लीं। दुकान से बाहर निकले, अंधेरा होने को था। जोरों की हवा चल रही थी, ठंड लगने लगी। हम कार में ...
मैं उर्मिला, एक गृहिणी, सांसारिक सुख-दुःख , फ़र्ज़-अधिकार, क़र्ज़-हर्ज़ में रमी हुई महिला हूँ | मैंने खुशनुमा जिन्दगी, बच्चों की परवरिश, बच्चों के विवाह सभी पलों को बहुत जी भरकर जिया | जीवन के उतार-चढ़ाव, अनुभव और अनुभूतियों का तीखा, मीठा, कड़वा रसास्वादन भी हुआ पर कहीं मैं इन सब में बंध कर रह गयी | आज अंतरजाल अर्थात् इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को आयाम दे कर स्वयं आज़ाद होना चाहती हूँ- पंखों को खोल कर स्वच्छंद उड़ना चाहती हूँ | उड़ कर देखूँ, पंखों में कितनी ताकत है !