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Showing posts from May, 2016

कहीं पढ़ी, अच्छी लगी |

* गैर को अपना बनाने की अदा जाती रही ,    दिल की महफिल को सजाने की अदा जाती रही |    कीमती कालीन जब से मेरे घर में आ गए ,    बेहिचक घर आने जाने की अदा  जाती रही |    बाथरूमों  की नई कल्चर में ऐसा बंद हूँ ,    खुल के बारिश में नहाने की अदा जाती रही |    वक्त ने कुछ ऐसे छीने प्यार के लम्हे ,    रूठने की और मनाने की अदा जाती रही | * एक ही गलती , सारी उम्र करते रहे ,    धूल चेहरे पे थी , हम आइना साफ करते रहे | * सब चाहते हैं मंजिलें पाना चले बगैर , जन्नत भी सभी को चाहिए मरे बगैर | * हर शख्श दौड़ता है यहाँ भीड़ की तरफ , फिर ये भी चाहता है , उसे रास्ता मिले |

एक अनुभव

                                                        मेरे घर एक परिचिता आई -काफी अस्वस्थ थी | कुछ दिन पूर्व उन्होंने एक नामी अस्पताल में घुटनों का ऑपरेशन कराया था | अब पुनः चेक अप के लिए वे उस अस्पताल जाना चाहती थी | मदद के तौर पर उन्होंने मुझे साथ चलने का अनुरोध किया | हम दोनों अस्पताल पहुंचे | ऑपरेशन डॉक्टर अवस्थी ने किया था | हमने रिसेप्शन पर बैठी महिला से पता कर लिया कि डॉक्टर अवस्थी  अस्पताल में आये हैं और थोड़ी देर में अपने केबिन में पहुँच जायेंगे | ५०० रुपये भर कर परचा बनवा लिया | हमारी तरह काफी मरीज डॉक्टर अवस्थी को दिखाने कतार में बैठे थे |                                                         2 घंटे की प्रतिक्षा के बाद भी डॉक्टर अवस्थी अपने केबिन में नहीं आये | कुछ मरीज बैचेन होने लगे -रिसेप...

अभिवादन - एक भारतीय परम्परा

                                              आज भागती जिन्दगी अर्थात् FAST LIFE में 'हाय ' 'हैलो 'कहने  की प्रथा  है ' नमस्ते' अब कौन कहता है , करता है ! गर्दन को थोडा झुकाकर हाथों को जोड़कर नमस्ते करना - एक पुरानी सी बात हो गई है | अभिवादन का तात्पर्य है- GREETING . यदि हम 'हैलो'  कह कर भी किसी का अभिवादन करते हैं  तो सामने वाले इंसान को उसकी अहमियत का अहसास होता है |                                                                                                                  हम राह चलते हर व्यक्ति को तो नमस्ते करते नहीं या हैलो कहते नहीं ! आपने गौर किया होगा-यदि हम किस...