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Showing posts from July, 2019

दीवार

     उस दिन पड़ोसी से क्या हुई तकरार,      उसने खड़ी कर दी दो ईंटों की दीवार।      गर्दन टेढ़ी कर झाँकता रहा, मन रहा बैचेन।      दो मकानों के बीच दीवार बना, कैसे मिल उसे चैन!      कहते हैं दीवारों के भी होते हैं कान,      कुछ सुन जाय, जरूर देती होगी ध्यान।      पर मेरी तरफ की दीवार न सुन सकती है,      मूक- बधिर है, न बोल सकती है।      बारिश हुई, एक जगह से ईंट निकल गई,      देखा मैंने मोखले में चिड़िया ही बस गई,      तिनके, पत्तों के योग से घोंसला बना लिया,      मेरी ओर से निश्चिन्त हो, उसने परिवार बसा लिया।      दो ईंटों के बीच एक बीज सुगबुगाया,      नमी मिली, मिली जान, वह अखुआया।      लो दीवार के बीच एक पौधा भी उग आया,      निराश न रहो- यह पौधा सीखा गया।      मैं निहार रहा दीवार, बैठा घर के बाहर,      प...