हरिप्रसाद बहुत खुश हैं | बिटिया आरती की सगाई रामस्वरूप के बेटे राजीव के साथ हो गई | उनके दोस्त रामस्वरुप ने अपना वचन निभाया | कुछ ही वर्ष पूर्व ही रामस्वरूप ने कह दिया था ' आरती को तो मेरे घर ही ले जाऊँगा |' आरती 5 वर्ष की थी , जब पत्नी का देहांत हो गया | आस पास ऐसा कोई रिश्तेदार नहीं था , जिस पर विश्वास करके हरिप्रसाद आरती को उन्हें सौंप पाते , लिहाजा परवरिश की पूरी जिम्मेदारी अपने ही हाथों में रखी | वे ही माँ थे और वे ही पिता भी | उनका हर दिन बिटिया को चुम्बन दे कर उठाने से शुरू होता और रात उसे थपथपाकर सुलाने से बीतता | सच मानो तो वे आरती के लिए ही जी रहे थे | घर के अन्दर आरती और घर के बाहर नौकरी - दोनों के बीच सामंजस्य बिठाए रखते थ...
मैं उर्मिला, एक गृहिणी, सांसारिक सुख-दुःख , फ़र्ज़-अधिकार, क़र्ज़-हर्ज़ में रमी हुई महिला हूँ | मैंने खुशनुमा जिन्दगी, बच्चों की परवरिश, बच्चों के विवाह सभी पलों को बहुत जी भरकर जिया | जीवन के उतार-चढ़ाव, अनुभव और अनुभूतियों का तीखा, मीठा, कड़वा रसास्वादन भी हुआ पर कहीं मैं इन सब में बंध कर रह गयी | आज अंतरजाल अर्थात् इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को आयाम दे कर स्वयं आज़ाद होना चाहती हूँ- पंखों को खोल कर स्वच्छंद उड़ना चाहती हूँ | उड़ कर देखूँ, पंखों में कितनी ताकत है !