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Showing posts from March, 2021

शुचि

            मैं 'राशि' एक दत्तक पुत्री। मैंने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि मेरे जैविक माता पिता कौन हैं, क्योंकि मैं अपने जीवन से बहुत खुश थी। किसी तरह का मलाल अपने मन में नहीं लाना चाहती थी। जरूर उन्हें मेरी जरूरत नहीं थी और इन्हें मेरी बहुत जरूरत थी। कहते हैं- पालने वाला जन्म देने वालों से बड़ा होता है। उनके द्वारा मैं तिरस्कृत हुई, पर यहां सिर आंखों पर बिठाई गई। माँ ने तो मेरे लिए नौकरी ही छोड़ दी। मेरे माता पिता ने मुझे भरपूर प्यार, संरक्षण, संस्कार और अच्छी शिक्षा दी। उच्चतम शिक्षा के लिए मैं विदेश गई, वहीं कुछ महीने नौकरी भी की। इस बीच रोहन से मुलाकात हुई। हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। रोहन को विश्वास था कि उसके माता पिता उसकी पसंद पर कोई एतराज नहीं करेंगे। पर यह बात मैं दावे के साथ नही कह सकती थी। मैंने रोहन को बता दिया था कि मेरे माता पिता के निर्णय पर ही रिश्ता कायम रख सकूंगी। हम दोनों भारत आए। दोनों के माता पिता को रिश्ता पसन्द आया। एक वर्ष के भीतर हमारी शादी हो गई। मेरी नौकरी जारी ही थी।             पीहर औ...