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Showing posts from July, 2024

इच्छा का सम्मान

          डॉक्टर सक्सेना आज फिर अपने बड़े बेटे पर झल्ला पड़े-"सुनील, तुम इस तरह समय बर्बाद करते रहोगे, तो नीट कैसे क्लियर कर पाओगे?" "पापा एक घंटे के लिए बैडमिंटन खेलने गया था। आपके कहे अनुसार कोचिंग भी जॉइन कर ली। आप जानते हो, मैं मेडिकल में नहीं जाना चाहता हूँ। मैं स्पोर्ट्स में अपना कैरियर बनाना चाहता हूँ।" "क्या, मेडिकल में जाना नहीं चाहता? अरे, मेरा यह हॉस्पिटल कौन संभालेगा? तुम्हारा छोटा  भाई बीमार रहता है, उससे MBBS की उम्मीद नहीं कर सकता। तुम्हें हर हाल में नीट क्लियर करना होगा।" 'हमेशा दूसरों के हिसाब से जिंदगी जिओ।'-यह बड़बड़ाता हुआ सुनील अपने रूम में चला गया।           डॉ. सूर्यकांत सक्सेना का बड़ा मल्टीस्पेशलिस्ट नर्सिंग होम है। कड़ी मेहनत से यह अस्पताल खड़ा किया है। छोटे शहर में इनका अलग रुतबा है। अस्पताल में कई स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स भी बैठते हैं, जिस से एक ही जगह कई बीमारियों का इलाज हो जाता है। सुनील के व्यवहार से डॉ. सक्सेना परेशान हो गए। रात पत्नी से बोले- इसे पढ़ाई के लिए दूसरे शहर भेजना पड़ेगा। यहां के यार-दोस्तों से दूर रहे...