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Showing posts from April, 2022

एक माँ- ऐसी भी

            यह मकान दिनेश ने बहुत तरीके से और सुविधाजनक बनवाया है। एक कमरे में टांड़ बना हुआ है। साल भर, बहुत कम काम आने वाला सामान इसमें रख दिया जाता है। दिन में घर का दरवाजा और खिड़की हमेशा खुले ही रहते हैं, मां- पिताजी आगे के कमरे में बैठे ही रहते हैं। दिशा ने गौर किया- गर्मी बहुत हो रही है, अब रसोई में मटका रखना पड़ेगा। टांड़ पर मटका रखा हुआ है। दिशा ने सीढ़ी लगाई और टांड़ में जा कर मटका खोजने लगी।। दिशा को किसी के कुसमुसाने की आवाज आई, वह घबरा गई। चारों तरफ नजर दौड़ाई। एक टोकरी में बिल्ली के 4 नवजात बच्चे हैं। हे भगवान, यहां बिल्ली कब आई और कब बच्चे जन गई? कुदरत का करिश्मा देखो- न अस्पताल भागी, न डॉक्टर, न दाई की मदद ली। कितनी सुरक्षित जगह ढूंढ कर प्रसव किया। पर माँ दिख नहीं रही है। दिशा मटका ले कर नीचे आ गई। वह जानती है- अपने बच्चों को संभालने माँ जल्दी ही आएगी। दिशा ने हॉल में आकर माँ बाबूजी को बता दिया। दोनों मुस्करा दिए, बाबूजी बोले -"खिड़की के रास्ते से बिल्ली आई होगी, बच्चों को ले जाएगी। दिशा तुम धीरे से टोकरी को नीचे ले आओ और पलंग के बगल में रख दो, उसे ...