राजू की उम्र 18-19 वर्ष होगी | ठेले पर फल - सब्जी बेचना -इसका रोजगार है | प्रायः मेरे आवास के आगे से निकला ही करता है | एक दिन वह घर के आगे से निकल रहा था तो मैंने उसे रोका और फलों के दाम जानने लगी | उसे दाम बताने में बहुत परेशानी हो रही थी | ऊपर की ओर मुँह करके दाम बताने लगा - मानों कोई पोपला बोल रहा हो | उसका मुँह तम्बाकू - जर्दे से भरा हुआ था | प्रायः देखा है - तम्बाकू- जर्दा खाने वालों को बोलने में परेशानी होती ही है , उनसे बात करने वाले भी असहज ही रहते हैं | राजू से दो मिनट बात करने में ही जर्दे की महक से मुझे परेशानी होने लगी | मैंने कहा -" राजू, तू हमें इतने बढ़िया फल खिला रहा है और तूने अपने मुँह में जहर भर रखा है | कभी सोचा है - तम्बाकू की आदत से भविष्य में तुझे क्या-क्या परेशानी होगी ?" राजू -" मुँह में कुछ डला रहे तो सुस्ती नहीं आती | " मैंने उसे समझाया -" सुस्ती भगाने के तो कई उपाय हैं , मुँह में टॉफी डाल लो , इलायची या सौंफ डाल लो | तम्बाकू से ज्यादा खर्चीली तो नहीं , शरीर भी बुरे परिणाम से बचा रहेगा | " बहुत प्यार से राजू को समझाया , इस ...
मैं उर्मिला, एक गृहिणी, सांसारिक सुख-दुःख , फ़र्ज़-अधिकार, क़र्ज़-हर्ज़ में रमी हुई महिला हूँ | मैंने खुशनुमा जिन्दगी, बच्चों की परवरिश, बच्चों के विवाह सभी पलों को बहुत जी भरकर जिया | जीवन के उतार-चढ़ाव, अनुभव और अनुभूतियों का तीखा, मीठा, कड़वा रसास्वादन भी हुआ पर कहीं मैं इन सब में बंध कर रह गयी | आज अंतरजाल अर्थात् इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को आयाम दे कर स्वयं आज़ाद होना चाहती हूँ- पंखों को खोल कर स्वच्छंद उड़ना चाहती हूँ | उड़ कर देखूँ, पंखों में कितनी ताकत है !