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Showing posts from March, 2017

सब्जी वाला

राजू की उम्र 18-19 वर्ष होगी | ठेले पर फल - सब्जी बेचना -इसका रोजगार है | प्रायः मेरे आवास के आगे से निकला ही करता है | एक दिन वह घर के आगे से निकल रहा था तो मैंने उसे रोका और फलों के दाम जानने लगी | उसे दाम बताने में बहुत परेशानी हो रही थी | ऊपर की ओर मुँह करके दाम बताने लगा - मानों कोई पोपला बोल रहा हो | उसका मुँह तम्बाकू - जर्दे से भरा हुआ था | प्रायः देखा है - तम्बाकू- जर्दा खाने वालों को बोलने में परेशानी होती ही है , उनसे बात करने वाले भी असहज ही रहते हैं | राजू से दो मिनट बात करने में ही जर्दे की महक से मुझे परेशानी होने लगी | मैंने कहा -" राजू, तू हमें इतने बढ़िया फल खिला रहा है और तूने अपने मुँह में जहर भर रखा है | कभी सोचा है - तम्बाकू की आदत से भविष्य में तुझे क्या-क्या परेशानी होगी  ?" राजू -" मुँह में कुछ डला रहे तो सुस्ती नहीं आती | " मैंने उसे समझाया -" सुस्ती भगाने के तो कई उपाय हैं , मुँह में टॉफी डाल लो , इलायची या सौंफ डाल लो | तम्बाकू से ज्यादा खर्चीली तो नहीं , शरीर भी बुरे परिणाम से बचा रहेगा | " बहुत प्यार से राजू को समझाया ,  इस ...

कर्म प्रधान विश्व करि रखा

कर्म प्रधान विश्व करि राखा , युग तो है कर्म का - यह सीखा | लकीरों की किस्मत पर विश्वास कहाँ ? मेहनत से लकीरों को बदल दे , विश्वास यहाँ ! चाहत से फूल झोली में नहीं गिरते , हाथों से डाली को हैं हम हिलाते | आँखें मूंद नहीं सकते भाग्य - भरोसे , तकदीर भी तो है तदबीर के भरोसे | सिंह भी सोते हुए निवाला नहीं पाता , किनारे बैठ मछुआरा मछली नहीं पाता | मांझी ने पहाड़ को काट रास्ता बनाया , तदबीर से नामुमकिन को मुमकिन बनाया | तकदीर से रार क्यों ठानी जाय ? अँधेरे से हार क्यों मानी जाय ? अपने हिस्से का दीया तो जलाना होगा , नाराज तकदीर को तदबीर से मनाना होगा |

तरेड़

                                      दुलारचंद ने कुलाह सिर पर जमाया , शीशे के सामने खड़ा पगड़ी बाँधने लगा | शीशे पर ध्यान गया - अरे , शीशे पर तो तरेड़ आ गई है | घर में खंडित शीशा रखना तो शुभ नहीं | वैसे भी घर में कुछ भी तो शुभ नहीं हो रहा | आज हाट बाजार  जा रहा है - दूसरा शीशा ले ही आएगा | आज पहली बार हाट जाने का उत्साह नहीं है |                                       गत वर्ष छोटे भाई नेमचंद का विवाह हुआ | दोनों भाईयों का परिवार बड़े प्रेम से रह रहा था | व्यापार में घाटा हुआ | दोनों पत्नियों के रहन -सहन की स्पर्धा ने घर में दीवार खड़ी कर दी | बंटवारा हो गया | पुश्तैनी मकान , पुश्तैनी व्यापार के दो हिस्से हो गए | आपस में बोलचाल बंद हो गई | बंटवारे में दुलारचंद ने कार ली और नेमचंद ने गाय -| दुलारचंद ने खिड़की से देखा - नेमचंद गाय दुह रहा है | दुलारचंद की पांच वर्षीया बेटी लाजो भागी आई | एक बड़ा खाली गि...

नारी शक्ति

                            दो दिन पूर्व हमने ' महिला दिवस ' मना कर हर वर्ष की तरह लकीर खींच ली या यूँ कहे हर वर्ष की तरह ' पर्व - अदायगी ' की | महिलाओं के गुणगान हुए , देश ने महिलाओं पर कई अहसान किए | सोचना होगा - ' क्या ऐसे दिवस की हमें जरुरत है ? '                              कुदरत और संस्कृति ने स्त्री को सृष्टि , समाज और संस्कार - निर्माण का विशेष दायित्व दिया है | इस दायित्व को निभाने के लिए स्त्री का दैहिक ही नहीं , मानसिक रूप से भी सक्षम होना जरुरी है | यह तो सच है कि एक स्त्री कई पीढ़ियों को शिक्षित कर लेती है |                               'बेटी बचाओ - बेटी पढाओ ' नारे को कितनी महिलाएं समझ पा रही हैं ! आज भी बेटी पैदा होने पर महिला घबरा जाती है | कन्या - जन्म पर घर का माहौल ग़मगीन हो जाता है | जब वह वजूद को बचाने में सक्षम नहीं हो पाती है , तो स्त्री - नस्ल ...