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Showing posts from March, 2020

बदलाव

            रागिनी अपनी बेटी राशि के साथ नदी के पानी के बीच खड़ी है। भाव विभोर हो कर बोली-" राशि, मैं हमेशा ट्रेन या बस से सफर करते समय नदी को निहारा करती थी, पर आज डुबकी लगाने का मौका मिला। आज तुम्हारे नानी,नानाजी का तर्पण करके मुझे आत्मसंतुष्टि मिल रही है। भीनी-भीनी ठंड में नदी की थाह का अनुभव मुझे रोमांचित कर रहा है। मैंने सोचा नहीं था-मैं यह सुख भी पा सकूँगी। बेटा, यह सब सम्भव हुआ तुम्हारे सहयोग से। किसी विचित्र बात है ना- नदी से मिलने के लिए मृत्यु ही जरिया बनी ! मैं पानी को देख रही हूं- इससे ज्यादा निर्मल कुछ नहीं हो सकता। इस नदी के पानी में कभी उफान भी आया होगा, तब यह क्रुध्द दिखी होगी ! अभी यह शांत और खामोश है।"             "माँ, इतने दिनों से तुम नदी पर ही आने की जिद क्यों कर रही थी ? यह तो घर पर भी हो सकता था।"             "हाँ बेटा, पर एक ऋणी पिता और ऋणी बन जाता। मैं इकलौती संतान हूँ। तुम्हारी नानी के जिंदा रहते जब भी वे दोनों मेरे पास आए , मेरे यहाँ खाने से बचते रहे । नानी के गुजरने के ब...