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Showing posts from June, 2016

बरसा पानी

रिमझिम बरसा पानी भीगा जयपुर , भीगे हम | मानसून ने दी दस्तक , आई राहत की मुस्कान ' ए बरखा राणी , माटी होगी गीली , इब आंधी को कोनी डर , ओजू , पधारो म्हारे देस , दो-चार दिन म्हारे संग रह्जो |'

तपता सूरज

      पौराणिक कथाओं में पढ़ा था -       हनुमान ने पाया अमर-जीवन ,       कहीं राह चलते ,       आज मिल जाए हनुमान ,       मैं हाथ जोड़ खड़ी हूँ-       'आज हो जाओ प्रकट ,       दोहरा दो पुनः वह शैतानी ,       कुछ पल निगल जाओ सूरज को ,       नहीं है मेरा कोई स्वार्थ ,       होगा सर्वजन हिताय |

गर्मी ! उफ्फ्फ गर्मी !

        जल बिन यह सूनापन ,         मुरझाती फसलें , मुरझाते चेहरे ,         आलू , प्याज , टमाटर के बढ़ते दाम,          थाली के घटते स्वाद ,          दूभर हुआ खान पान | *          *          *          *          *           राजस्थान में है मोरों का वास ,           खामोश नभ को देख ,           मोर का भी बदला सुर,           ' मेह आओ , मेह आओ ',           करुण- क्रंदन छूता दिल को |

ये तपन

       चिंटू की हड्डियाँ हैं कमजोर ,        गए चिकित्सक के पास ,        बोले -'विटामिन डी की है जरुरत ',        दिया सुझाव-' आधा घंटे लें ,        उगते सूरज की आंच' ,        पर हुआ यह नामुमकिन ,        उगता सूरज ही है बड़ा क्रोधित ,        बरसा रहा दावानल ,        सह न सका चिंटू ,        विटामिन डी की आंच |    

गर्मी ! गर्मी ! गर्मी !

         ये भीषण गर्मी ,          दिनोंदिन बढ़ती तपन ,          आग बरसाती ये सूरज की किरणें ,           पसीने से सराबोर इंसान ,           हर पल घूरता नभ को ,           कब बरसेगा पानी |

पुण्य की परिभाषा -16जून -निर्जला एकादशी के उपलक्ष्य पर

                                               जेठ महीने की तपती दोपहर | बिजली का बिल भर  कर अंकित लौटा ही था | घर के बाहर के लॉन को पार करके घर में प्रवेश कर ही रहा था कि बगिया में काम करते हुए माली ने कहा -" बेटा, बहुत प्यास लगी है , मेरी बोतल में तनिक ठंडा पानी भरवा दो |" अंकित ने ज्यादा विचार न करते हुए माली के हाथ से बोतल ली और घर के अन्दर आ गया | माली चिल्लाता रहा -"बेटा , सुनो तो !"  पर अंकित घर में प्रवेश कर चुका था |                                                  अंकित ने आवाज दे कर कहा -" माँ , माली काका की बोतल में ठंडा पानी भर दो और मुझे भी पानी पीना है | माँ , बाहर तो आग ही बरस रही है |" कमरे में सोफे पर बैठी  दादी ने देखा भी और सुना भी | जोर से चिल्ला पड़ी -" अरे तो तू उसकी बोतल ही क्यों उठा लाया ? इसे परे को रखिये...

चौराहे पर --------1978 में लिखित

      उत्पन्न हुआ एक निराला शौक ,       निकल पड़ी मैं करने मोर्निंग वॉक       बजे थे छः उदित सुबह के ,       जैसे ही पहुंची द्वार निज घर के |       दिख पड़े अभिमानी , दक्षिणा-ग्राहक पंडित,       बरस रहे थे नन्हे बालक पर हो क्रोधित |       स्पर्श हो गया था वह बालक उनसे ,       हुई यह छोटी सी गलती उससे      'नाश हो तेरा , नीच अधम ' वे बोले ,      करते रहे उसे अपमानित मुँह खोले |      अपराधी-सा मौन खड़ा वह बालक ,      भरी भीड़ में बना पात्र नालायक |      उठ पड़ा ब्राह्मण का हाथ ऊपर ,      पर करा नीचे कुछ सोचकर |     चले गए वे यह बड़बड़ाकर -     'करना पड़ेगा अब स्नान मुझे जा कर '|                                   मुझ में न जाने क्या विचार जागे ,             ...

4o वर्ष पूर्व ------मेरे जीवन की एक रोचक घटना -प्रथम पुरस्कार |

                                                       अब तक आपके जीवन में भी कई घटनाएँ घटी होगी ,जिन्हें याद करके कभी आप रो पड़ते होंगे , तो कभी अनायास आपके होठों पर हल्की मुस्कान आ जाती होगी | मेरे जीवन में भी एक रोचक घटना घटी जो कि मेरे लिए काफी प्रेरणास्पद रही , जिसे में कभी भूल नहीं सकती | सच कहूँ तो इस घटना ने मुझे नानी याद दिला दी , दाल- रोटी के सब भाव  मालूम पड़ गए |                                                        1975 में गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थी | राशन की बड़ी हायतौबा मच रही थी | मालूम पड़ा - फलाने  दिन दुकान पर राशन आने वाला है , पर भेजा किसे जाय ? माताजी सबकी तरफ प्रश्न भरी निगाहों से देखने लगीं | राशन लाना ,मतलब पूरा दिन लगा देना | नौकर ने गौने के लिए यही दिन उचित समझा अतः छुट्टी ...