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Showing posts from November, 2017

व्हाट्सअप

                                               व्हाट्सअप में हम सहेलियों का ग्रुप बड़ा सक्रिय और मनोरंजक हो गया है | राजश्री के चुटकुले पढ़ते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है , तो माधवी कवीयों के चुने हुए पद्द्यांश ही व्हाट्सअप कर देती है , जिन्हें मैं शेयर करे बिना नहीं रह पाती हूँ | सुनीता को राजनीति के हास्यास्पद कार्टून या छीटाकशी के वाकये ही पसंद है | सुनिधि के व्हाट्सअप तो दिल को छू देते हैं | रिश्तों की अहमियत , रिश्तों में मिठास , माता पिता के प्रति सम्मान के उसके मैसेज बहुत अच्छे लगते हैं | आज के भागदौड़ की जिन्दगी में रिश्तों को इतना महत्त्व कौन दे पाता है ! सुलझी सोच , संवरा व्यक्तित्व और प्रबुद्ध दृष्टिकोण यही काफी है - अपना प्रभाव छोड़ने के लिए | एक तरह से कहा जाए व्हाट्सअप के बीच समय अच्छा बीत जाता है और समीपता बनी रहती है | जब 3-4 सहेलियाँ ऑनलाइन हों तो रोचक वार्ता भी छिड जाती है | मुट्ठी बंद अंगूठा ऊँचा दिखा कर - पसंद होने का आभास कराना , तरह -तरह के चेहरे दि...

सपना - अपना (भाग 2)

कमाया हुआ धन , परिवार की माया , हरे भरे बाग़ , माता पिता की छाया |             - अब बन गया एक सपना | अब छोड़ो , हुई यह बात पुरानी , इसमें है न कोई दम , यह मैंने जानी | अब आया , ' हाय - हैलो ' का ज़माना , कह दो भैय्या , इसे मॉडर्न ज़माना |              - इसे ही कहो अपना | एकल परिवार , व्यस्त माता - पिता , अब रहा न कोई राम , न कोई सीता | दंगा - फसाद , ये रोज के लफड़े , बढ़ते सपने , घटते कपडे |             - इसे ही कहो अपना | इन्टरनेट से बन गयी दुनिया छोटी, खा बर्गर पिज़्ज़ा , भूले रोटी | दो दो मोबाइल सदा रहे साथ ,  ले गर्लफ्रेंड के हाथों में हाथ |             - इसे ही कहो अपना | मानो मेरी बात ,सपने देखना छोड़ो , यथार्थ में जियो , ख़्वाबों को तोड़ो | हम आप बन जाए कर्णधार , क्यों रहे देश बीच मझदार ?            - इसे ही कहो अपना | शिक्षा , संस्कार , प्यार के खोल दो खाते , विरासत में न होंगे खजाने रीते | युवा पीढ़ी को द...

' सपना - अपना '

नारी की साड़ी , माँ का आँचल , दुल्हन का परदा  , वो प्रेम के बोल | माचिस की तिल्ली , मिट्टी का चूल्हा , एक टेलीफोन से जुड़ा पूरा मुहल्ला |                    - अब बन गया एक सपना | सीमित सपने , संयुक्त परिवार , लहराती चोटी , दादी का प्यार | बाजरे की रोटी , गुड़ की मिठास , कलम -दवात और चिट्ठी की आस |                      - अब बन गया एक सपना | वो देश प्रेम , इंसानों में राम , निरोगी काया , बेरोजगारों को काम | अनाज के ढेर , सर्कस और मेला , आदर - सत्कार , गुरु और चेला |                        - अब बन गया एक सपना | मनुष्य की आयु , आकाश में उड़ते पंछी , पड़ोसी अंकल की डांट भी लगती अच्छी | गुल्ली - डंडा , खेल का मैदान , चुस्त - दुरुस्त , खिला - खिला मन |                       - अब बन गया एक सपना | सिलबट्टे की चटनी ,तीखा अचार | रिवाजों का बंधन , धोंक नमस्...