व्हाट्सअप में हम सहेलियों का ग्रुप बड़ा सक्रिय और मनोरंजक हो गया है | राजश्री के चुटकुले पढ़ते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है , तो माधवी कवीयों के चुने हुए पद्द्यांश ही व्हाट्सअप कर देती है , जिन्हें मैं शेयर करे बिना नहीं रह पाती हूँ | सुनीता को राजनीति के हास्यास्पद कार्टून या छीटाकशी के वाकये ही पसंद है | सुनिधि के व्हाट्सअप तो दिल को छू देते हैं | रिश्तों की अहमियत , रिश्तों में मिठास , माता पिता के प्रति सम्मान के उसके मैसेज बहुत अच्छे लगते हैं | आज के भागदौड़ की जिन्दगी में रिश्तों को इतना महत्त्व कौन दे पाता है ! सुलझी सोच , संवरा व्यक्तित्व और प्रबुद्ध दृष्टिकोण यही काफी है - अपना प्रभाव छोड़ने के लिए | एक तरह से कहा जाए व्हाट्सअप के बीच समय अच्छा बीत जाता है और समीपता बनी रहती है | जब 3-4 सहेलियाँ ऑनलाइन हों तो रोचक वार्ता भी छिड जाती है | मुट्ठी बंद अंगूठा ऊँचा दिखा कर - पसंद होने का आभास कराना , तरह -तरह के चेहरे दि...
मैं उर्मिला, एक गृहिणी, सांसारिक सुख-दुःख , फ़र्ज़-अधिकार, क़र्ज़-हर्ज़ में रमी हुई महिला हूँ | मैंने खुशनुमा जिन्दगी, बच्चों की परवरिश, बच्चों के विवाह सभी पलों को बहुत जी भरकर जिया | जीवन के उतार-चढ़ाव, अनुभव और अनुभूतियों का तीखा, मीठा, कड़वा रसास्वादन भी हुआ पर कहीं मैं इन सब में बंध कर रह गयी | आज अंतरजाल अर्थात् इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को आयाम दे कर स्वयं आज़ाद होना चाहती हूँ- पंखों को खोल कर स्वच्छंद उड़ना चाहती हूँ | उड़ कर देखूँ, पंखों में कितनी ताकत है !