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Showing posts from April, 2021

दृष्टिकोण

            मुझे नागपुर में रहते हुए 20 वर्ष हो गए हैं, तब बच्चे छोटे थे। अब सब की पढ़ाई हो गई, शादी हो गई। यह घर और घर के आसपास के लोग, यह सोसाइटी मुझे बड़ी प्यारी लगती है। इसने हमें बहुत कुछ दिया- मीठी यादें, कड़वे अनुभव, संघर्ष पूर्ण जीवन और अधिक मुसीबतों को झेलने का  हौसला..। मेरी हम उम्र बहनों से तो मानो लगाव हो गया है। स्मिता बहन, नीलिमा भाभी, संगीता भाभी, जया भाभी, देनिका भाभी- ये सब अपने परिवार की सी लगने लगी हैं। हम सब अपनी समस्याओं को आपस में ही चर्चा कर सुलझाने का प्रयास करती हैं।             काफी दिन हो गए थे, हम सब साथ बैठ कर गप नहीं मार पाए थे। तय हुआ-- शाम चार बजे सभी मेरे घर आ जाएंगी। साथ में चाय पिएंगे। सभी समय पर आ गई, मानो चार बजने का ही इन्तजार कर रही हों ! कोई टिफिन में पकौड़ी, चटनी ले आई, कोई मठरी, तो कोई ढोकला। लो जी, घर में चाट की टेबल सज गई। खा पी लेने के बाद देनिका भाभी ने अपने पर्स में से एक डब्बा निकाला। मेरी बहू को बुला कर बोली- "तुम्हारे अंकल मेरे लिए स्मार्ट फोन लाए है, तुम मुझे इसे चलाना सीखा दो...