इन दिनों राजेन्द्र का बेटा नितिन अमेरिका से आया हुआ है, उसका परिवार अमेरिका में ही है-आया था 10 दिनों के लिए, पर लॉक डाउन की वजह से अब ज्यादा दिन रहना होगा। साथ रहते रहते नितिन ने अहसास किया- 'आज हमारे पास समय बिताने के कई जरिये हैं, पर बुजुर्ग माता-पिता को तो परेशानी होती! अच्छा हुआ, इस समय मैं इनके पास हूँ। आज इनके मनोरंजन के लिए कुछ करूँगा।' नितिन ने समय तय करके बच्चों को मोबाइल हाथ में लेने को कहा और अपने पास मम्मी-पापा को बैठाया । राजेन्द्र और उनकी पत्नी विस्मय निगाहों से देख रहे हैं। नितिन बच्चों से कह रहा है- "मैं तुम्हें कोड नंबर दे रहा हूँ, तुम दोनों लूडो में जॉइन करो और दादा-दादी के साथ खेलो।" लूडो खेलने में एक दूसरे की गोटी कटने पर बच्चों का इमोजी भेजना-दोनों को रोमांचित कर रहा है। हर तीसरे दिन नितिन अपने परिवार और बहन के परिवार से ज़ूम पर वीडियो कर लिया करता। माता-पिता की खुशी का पूरा ध्यान रखता। नितिन ने गौर किया-रोज सुबह पड़ोस के मिश्रा जी अपनी बालकनी...
मैं उर्मिला, एक गृहिणी, सांसारिक सुख-दुःख , फ़र्ज़-अधिकार, क़र्ज़-हर्ज़ में रमी हुई महिला हूँ | मैंने खुशनुमा जिन्दगी, बच्चों की परवरिश, बच्चों के विवाह सभी पलों को बहुत जी भरकर जिया | जीवन के उतार-चढ़ाव, अनुभव और अनुभूतियों का तीखा, मीठा, कड़वा रसास्वादन भी हुआ पर कहीं मैं इन सब में बंध कर रह गयी | आज अंतरजाल अर्थात् इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को आयाम दे कर स्वयं आज़ाद होना चाहती हूँ- पंखों को खोल कर स्वच्छंद उड़ना चाहती हूँ | उड़ कर देखूँ, पंखों में कितनी ताकत है !