Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2018

इति

            मैं ' इति '-जनार्दन जी की तीसरी पुत्री | मेरी दो बड़ी बहनें - रीमा और श्यामा | छोटे शहर में एक साधारण परिवार- जो कि अपने निर्णय कम ही ले पाता  है, परन्तु दूसरों की आलोचनाओं से विचलित जरुर होता है | दो पुत्रियाँ होने के बाद कुलदीपक के आस में  तीसरी और आखिरी असफल प्रयत्न के रूप में -मैं | इसीलिए पिताजी ने मेरा नाम रखा - 'इति' अर्थात्- समाप्ति , फुलस्टॉप | इसके अलावा रिश्तेदारों के सहानुभूति पूर्ण अटपटे वाक्यों के कारण मेरा परिचय एक अवांछित और अनुपयोगी प्राणी के रूप में होने लगा , जो कि मुझे कदापि बर्दाश्त नहीं था |         जब से मैंने होश संभाला - अपने नाम  का अर्थ ही बदल लिया | इति मतलब नकारात्मक विचारों की समाप्ति , समस्याओं का अंत | स्वाभाविक है हर समस्या सहजता से हल नहीं होती , कभी कभी बगावत भी करनी पड़ती है | बचपन से दो ही शौक रहे - पढ़ाई और खुद को उपयोगी साबित करने का जूनून | घर में पढ़ाई का माहौल था नहीं | माँ की शिक्षा थी - तुम्हें दूसरे घर जाना है, सो गृहकार्यों में दक्ष होना जरुरी है | लड़कियों की डिग्री क...