मैं ' इति '-जनार्दन जी की तीसरी पुत्री | मेरी दो बड़ी बहनें - रीमा और श्यामा | छोटे शहर में एक साधारण परिवार- जो कि अपने निर्णय कम ही ले पाता है, परन्तु दूसरों की आलोचनाओं से विचलित जरुर होता है | दो पुत्रियाँ होने के बाद कुलदीपक के आस में तीसरी और आखिरी असफल प्रयत्न के रूप में -मैं | इसीलिए पिताजी ने मेरा नाम रखा - 'इति' अर्थात्- समाप्ति , फुलस्टॉप | इसके अलावा रिश्तेदारों के सहानुभूति पूर्ण अटपटे वाक्यों के कारण मेरा परिचय एक अवांछित और अनुपयोगी प्राणी के रूप में होने लगा , जो कि मुझे कदापि बर्दाश्त नहीं था | जब से मैंने होश संभाला - अपने नाम का अर्थ ही बदल लिया | इति मतलब नकारात्मक विचारों की समाप्ति , समस्याओं का अंत | स्वाभाविक है हर समस्या सहजता से हल नहीं होती , कभी कभी बगावत भी करनी पड़ती है | बचपन से दो ही शौक रहे - पढ़ाई और खुद को उपयोगी साबित करने का जूनून | घर में पढ़ाई का माहौल था नहीं | माँ की शिक्षा थी - तुम्हें दूसरे घर जाना है, सो गृहकार्यों में दक्ष होना जरुरी है | लड़कियों की डिग्री क...
मैं उर्मिला, एक गृहिणी, सांसारिक सुख-दुःख , फ़र्ज़-अधिकार, क़र्ज़-हर्ज़ में रमी हुई महिला हूँ | मैंने खुशनुमा जिन्दगी, बच्चों की परवरिश, बच्चों के विवाह सभी पलों को बहुत जी भरकर जिया | जीवन के उतार-चढ़ाव, अनुभव और अनुभूतियों का तीखा, मीठा, कड़वा रसास्वादन भी हुआ पर कहीं मैं इन सब में बंध कर रह गयी | आज अंतरजाल अर्थात् इंटरनेट के माध्यम से अपने विचारों को आयाम दे कर स्वयं आज़ाद होना चाहती हूँ- पंखों को खोल कर स्वच्छंद उड़ना चाहती हूँ | उड़ कर देखूँ, पंखों में कितनी ताकत है !