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Showing posts from September, 2017

एक लघु कथा -सूत्र

आज तो हद ही होगी - स्कूल की बस घर के सामने खड़ी है , ड्राइवर हॉर्न दे रहा है और आर्यन अपने दोस्त से मोबाइल पर बात ही कर रहा है । मैंने मोबाइल हाथ से छीना , तब भागा । सुबह से आर्यन के इस व्यवहार से मेरा मन खिन्न है , इसकी दोस्तों से इतनी क्या बातें होती हैं ! रोज स्कूल में  मिलते ही हैं ! सारे दिन मोबाइल पर घंटों बाते करता रहता है - पढ़ाई का हर्जा और अतिरिक्त खर्चा । इसे वित्तीय स्वतंत्रता क्या दी गयी , यह फ़ायदा ही उठा रहा है । महीने के अंत में 2500-3००० रुपयों का बिल - एक आम बात हो गयी है | फटकारो , तो गुस्से में बड़बड़ाने लगता है । बड़ों के लिए अजब सी दुविधा है कि आज के सुविधा संपन्न और स्वछंद परिवेश में परवरिश की दिशा क्या हो ? बच्चों में चिड़चिड़ापन ,आक्रामक व्यवहार और जल्दी गुस्सा आना एक आम समस्या हो गई है । शुक्र है - स्कूल में मोबाइल ले जाने कि इजाजत नहीं है । श्रीमान जी तो चाय पीते पीते अखबार पढ़ने में व्यस्त हैं , पर मेरा टेंशन बढ़ता ही जा रहा है । इन्होने अखबार समेटते हुए कहा - " मौसम बहुत अच्छा है , बारिश हो कर चुकी है । चलो ,थोड़ा घूम आते हैं । हरियाली का लुत्फ़ उठाया जाय । ...

अप्रत्यक्ष सेवा

                             राजश्री महीने के आखिरी शनिवार -रविवार घर की साफ - सफाई करती है । आज ननद - भौजाई सफाई - अभियान में जुटी हुई हैं । संगीता ने अपनी किताबों की अलमारी , कपड़ों की अलमारी , कमरे की सफाई की । राजश्री ने रसोई की सफाई की । प्रायः रसोई में टूटे -फूटे प्लास्टिक के , लोहे के डब्बे निकल ही जाया करते हैं । राजश्री को कबाड़ सहेज कर रखना पसंद नहीं । सफाई हो तो पूरी हो ! वैसे भी उसने कहीं पढ़ा था - ' घर में कबाड़ इकट्ठा करने से नकारात्मक भावनाएं भी इकट्ठी होने लगती हैं । ' उसने उन डब्बों को भी कूड़े की बाल्टी में डाल दिया ।                                राजश्री ने संगीता को आवाज दी - " सारी सफाई हो जाए तो नुक्कड़ पर रखे बड़े डब्बे में यह बाल्टी पलट आना । "                  ...

धरती करे पुकार

अपने ही देश में  फैला कैसा यह आतंक , अपने ही अपनों से हैं, भयभीत - राजा हो या रंक। दूध ,फल , तरकारी , सब हैं मिलावट से तराबोर , साँसें हुई सस्ती ,यह कैसा कारोबार ? रिसते जख्म , पीकर मिलावट का जहर , नासूर बन पड़ रहा स्वास्थ्य पर कहर । लूट - खसोट , साजिशों का तूफान , बढ़ता  भ्रष्टाचार , ढा रहा आम जनता पर हो घोर अत्याचार । कौड़ियों के मोल हुए , जान ईमान इंसान के , बढ़ रही रंजिश , दुश्मन हुआ भाई - भाई के । बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ - जुमला सुना सदा , हो रही अस्मिता की हत्या , है हर कोई गमजदा । भूखे गिद्ध के मानिंद , कुचल रहे नारी सम्मान , भीतर है खौफ , गली - गली में हो रहा मान - मर्दन । वैज्ञानिक युग में सफर हुआ , क्यों अनिश्चित , असुरक्षित , लापरवाही की इंतिहा , जिंदगियां हुई उपेक्षित । राम नाम का जाप करो , जीवन छुक-छुक रेल भरोसे , बेपटरी होती ट्रेनें , दहकते दर्द ,अहकती  साँसें । मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम से, बन बैठे योगी , चल चरित्र से है ये लम्पट , योगी नहीं , हैं भोगी । पाखंडी बाबाओं के दोगलेपन से ,श्रृद्धा पर पड़ रही मार , 'विश्वास ' से  हो...