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Showing posts from December, 2018

मंगलमय शुरुआत

          नए साल का पहला दिन 365 पृष्ठों की कोरी किताब के पहले पन्ने के समान है। नकारात्मकता को त्यागकर पन्ने की शुरुआत सकारात्मक कदमों से हो, तो वर्ष भर खुशियां झोली में भरती रहेंगी। अच्छी सोच और विचारों के साथ की गई हर कोशिश जीवन का नजरिया ही बदल देती है। हो सकता है- छोटी छोटी कोशिशें एक बड़े बदलाव की नींव मजबूत कर जाए।           बीते वर्ष मेरे मन में कई इच्छाएं जागीं, मेरी महत्वकांक्षाओं ने चूहे की भांति बिल से मुंह निकाला, पर बिल्ली रानी के पदचापों के आभास मात्र से....दुबक गई। आज गौर करती हूं, तो पाती हूँ-बिल्ली की आहट तो एक बहाना थी। मैं ही अकर्मण्य रही-मेरी महत्वाकांक्षा तो मात्र एक वैचारिक आकांक्षा थी।           हर नई शुरुआत दुआओं के साए में हो, हम महफूज रहें- यह बड़ी चुनौती बन गई है। जाति, धर्म, गो-सेवा को ले कर आए दिन हो रही हिंसा ताईद करती है कि लोगों को कानून हाथ में लेने की छूट मिल गई है। भारत एक मूढ़ धार्मिक हिंसा की तरफ बढ़ने वाला देश बनता जा रहा है, फिर भला दिन मंगलमय कैसे हो ?      ...

वटवृक्ष

          इंसान के दिमाग की सुरंग बहुत लंबी हुआ करती है, उसमें बेशुमार लड़खड़ाते अल्फाज़, दुःख भरे चलचित्र चलते रहते हैं। आसपास में कोई सुनने वाला हो या ना हो, पर वे शब्द खुद को ही सुनाई देते रहते हैं। यही स्थिति है-नब्बे वर्षीया रामप्यारी की। आसमान वाले से शिकायत भरे लहजे में इल्तिजा कर रही है, बड़बड़ा रही है-' इत्ती लंबी उमर कोई को ना देना। उमर छोटी हो पर चैन-सुकून की हो। मैंने क्या पाया? 20 वर्ष पहले पति का देहांत हुआ तो लगा-जीवन संध्या का अंतिम अध्याय आ गया। पर बेटे के परिवार के बीच जीवन के दिन सुकून से निकलते गए। 6 वर्ष पूर्व बेटा गुजर गया। सख्त जमीन पर चलते-चलते तलवे भी सुन्न हो जाते हैं, एक मां का जीवन तो नीरस होना ही था। ऐसे में अपनी साँसों को निबाहना अपनी मजबूरी होती है। अब....हे प्रभु, यह धरती फट क्यों नहीं जाती? कल एक सड़क दुर्घटना में जवान पोता चला गया। यह दुःख भी इन बूढ़ी आंखों के आगे !             अचानक रामप्यारी को कोमल हाथों का स्पर्श हुआ, मानो तपती धरती पर शीतल जल के छींटे गिरे हों। रामप्यारी का 5वर्षीय पड़पोता गोदी में आ...