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Showing posts from February, 2023

मेरे अंतर्मन की आवाज

कसमसाते विचार, घुटती साँसे, एक कसक कुछ न कर पाने की,  खुद से करते अनगिनत सवाल,  बेड़ियों के बंधन की यह पीड़ा,  दबी सिसकती हुई यह चुप्पी।                              यही है अंतर्मन का द्वंद्व। समाज की सच्चाई का प्रतिबिंब हूँ, रही विवशता मेरे व्याकुल मन की, अनचाहे ढंग से कह दी अनकही बात, वेदना का स्वर क्यूं कर कचोट रहा, भीतर तमस घनघोर गहरा गया।                              यही है अंतर्मन की व्याकुलता। बदलती जिंदगी मुझे जीना सीखा रही, हुआ कलुषित विकारों का प्रस्थान, सच-झूठ के फर्क का हो रहा है ज्ञान, भीतर की आवाज कर रही सजग, अब आँखे मूंद, उसे सुन ही लूँगी।                                मेरे अंतर्मन की आवाज।

यह कैसा दोष

          रमेश का ग्रेजुएशन हो गया था। वह आगे पढ़ना चाहता था, पर पिताजी का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। व्यापार को संभालने के लिए पिताजी को सहयोग देना जरूरी था। छोटा भाई राजीव आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जा चुका था। पिताजी स्वस्थ हो गए, पर रमेश की पढ़ाई पर पूर्ण विराम लग ही गया। विवाह हो गया, जिम्मेदारी बढ़ गई। राजीव ने पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेश में ही नौकरी कर ली। मां- पिताजी की पसंद की लड़की रश्मि से राजीव का विवाह हो गया। जब कभी राजीव भारत में रहता, परिजनों के प्रति अपार प्रेम उमड़ ही जाता। माँ दोनों बेटों  को साथ देखती तो कहती-"तुम दोनों मेरे राम लक्ष्मण हो।" ,विवाह के थोड़े दिन बाद राजीव, रश्मि विदेश  चले गए। वहीं के हो कर रह गए। राजीव ने बिज़नेस शुरू कर लिया- दोनों व्यस्त हो गए, परिवार बढ़ा, सब वहीं के रहन सहन में ढल गए। माँ बीमार हुई, बिस्तर पकड़ लिया। राजीव को खबर कर दी थी, पर उसने अपने नए बिजनेस का हवाला दिया और नहीं आया। माँ के देहांत पर भी नहीं आया। पिताजी के प्रति रमेश की जिम्मेदारी बढ़ गई। लोग कहते है - वे एक अच्छे परिवार से हैं। सवाल यह कि अच्छा परिवार बन...