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Showing posts from August, 2016

प्रकृति का उपहार

                            वर्षा थमे बीते दिन चार ,                             भीगी -भीगी सी है दिवार |                             टंगी हुई अम्मा-बाबा की तस्वीर ,                             सील गई ,हुए कागज़ तार-तार |                             दिखाया एक खेल कुदरत ने,                             पिछवाड़े के मैदान में |                             खरपतवार ने फैलाया जाल,                             निर्जन भू ने ओढ़ी हरी शॉल | ...

सूनापन

                                               रमा के पड़ोसी शर्मा जी के 3 बेटे हैं | शर्मा दम्पत्ति को हमेशा गुमान रहा कि उनके 3 बेटे हैं , कोई बेटी नहीं | बेटे बड़े हो गए हैं | कोई कॉलेज में पढ़ रहा है तो कोई कोचिंग में जाता है | श्रीमती शर्मा पूरे दिन घर को व्यवस्थित करने और बेटों के फैले कामों को बटोरने में लगी रहती हैं | इनके घर में पुरुष-बहुलता होने के कारण सभी के विचारों में अहम् टपकता ही है | व्यावहारिकता में भी ये लड़के स्त्रियों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं क्योंकि इन्होंने ' बहन ' के रिश्तों को कभी जाना ही नहीं !                                                 आज रक्षाबंधन है - राजस्थानी परिवार होने के कारण रमा के यहाँ इस त्यौहार को अलग अंदाज से मनाया जाता है | हॉल में दोनों भाई , दोनों भाभी , दोनों भतीजियाँ - रीना और टीना एवं दोनों भतीजे -रा...

गोसेवा का दिखावा

                                          बचपन से ही घर में सुनती और देखती आई हूँ- चूल्हा जले तो पहली रोटी गाय की हो | दादी  कहती थी -'गाय में सभी देवताओं का वास होता है |' आज भी दादी के दिए संस्कार हमारी आदत में निहित है  | गाय को देवता के रूप में मानना -सभी इस बात के पक्षधर नहीं हैं | हाँ , गोहत्या न हो -यह तो सभी मानते हैं |                                            पिछले दिनों दादरी में कुछ शरारती तत्वों ने मोहम्मद अख़लाक़ के घर में गोमांस की अफवाह फैलाई और इस शक में उसे पीट-पीट कर मार डाला | हिन्दू- मुसलमान या जातीय- विवाद के लिए ' गाय ' को मोहरा बनाया जा रहा है | राजनैतिक दांवपेंच खेले जा रहे हैं | यह एक संवेदनशील विषय है |                                       ...

फिर घिर आए बदरा

फिर घिर आए बदरा , चहुँ ओर छाया अंधियारा | नभ में बिछी एक काली चादर , सूरज को है ओट छिपाए | तपती धरती ,खुश्क हवा , टप-टप, टप-टप बरसा पानी | लो बरसन लागी बदरिया झूम के