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Showing posts from July, 2016

करे कौन , भरे कौन !

                                   आज अखबार में पढ़ा - मन बहुत विचलित और आक्रोशित हुआ | स्कूल की बस का ड्राइवर इअरफोन पर गाना सुनते हुए बस चला रहा था |  मानव रहित क्रोसिंग पर से बस को ले जाते वक्त आती हुई ट्रेन को देख कर भी जल्दबाजी में पटरी पार करने की कोशश की | आश्चर्य की बात यह कि पटरी के पास गुजर रहे एक कर्मचारी के चिल्लाने पर भी ड्राईवर ने बस नहीं रोकी  | खुली आँखों से अनहोनी जान कर भी  उसने अपनी और बच्चों की जान दांव पर लगा दी , भला इयरफोन लगे बंद कानों से उस कर्मचारी की आवाज कैसे सुन पाता ! बस , बहुत बड़ा हादसा हो गया  | सभी असमय काल के आगोश में आ गए | दर्दनीय स्थिति उन अभिभावकों की हो गई , जिन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए एक सुरक्षित हाथ चुना था | एक लापरवाही से या यूँ कहे जानबूझ कर की गई गलती से कई घर के आँगन सूने हो गए |                                      इयरफोन...

" टैक्सी से चालंगा "

                                             बात काफी वर्षों पुरानी है , पर याद मानो आज भी ताजा है | मोदानीजी के चार भाईयों के परिवार में बेटियाँ ब्याह लायक हो चुकी थी | लोकनाथ जी सबसे बड़े थे | सादगी एवं सज्जनता के वे प्रतिमूर्ति थे | लोकनाथ जी  की बहन सुशीला जी उनके साथ ही रहती थी | बेटियों की शादी की चिंता लोकनाथ जी से ज्यादा उनकी बहन को थी -या यूँ कहो बहन के चिंता करने के कारण लोकनाथ जी कुछ बेफिक्र थे |                                                                                          सुशीला जी एक स्कूल में अध्यापिका थी | प्रायः उस स्कूल में एक ब्राह्मणी कमला कई बच्चों को छोड़ने आया करती | शायद अपने मोहल्ले के सभी छोटे बच्चों को एक साथ स...
                                                      मैं ' उमा ' ख्वाबों की दुनिया में मैं , पहचाने राहों पर अनजान न जाने कहाँ खो गई | विस्मृत यादों में धुंधली - सी परछाई अपनी पाई | तीन बहनों में मैं मझली , पापा ने नाम दिया  ' उर्मिला ', दादी ने किया एतराज, '' नाम है बड़ा | पुकारूंगी , तब तक भाग जायेगी | ' उमा ' नाम है छोटा ,  कहते ही पास पाऊँगी |" मेरी दादी थी मॉडर्न , डेढ़ अक्षर कम कर के मुझे दिया निकनेम |

अपनों के खोने का भय

                                                   आज घर में चारों तरफ शोर हो रहा है | माहौल बहुत खुशनुमा है | हो भी क्यों ना ! आज अम्मा अस्पताल से आ रही हैं | गत माह अम्मा को पीलिया हो गया था | भैय्या की शादी थी- बस बदपरहेजी हो गई और पीलिया बिगड़ गया | शादी के तुरंत बाद ही अम्मा को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा | पूरे  एक माह बाद अम्मा का घर आना सभी को अच्छा लग रहा है |                                                    मुझे अच्छी तरह याद है | एक दिन मेरी सहेली स्मिता की देखादेख मैंने अम्मा को ' दादी ' कह कर पुकार लिया | उन्होंने अनसुना कर दिया | मैं उनके पास गई और पल्ला पकड़ कर बोली -"मैं आप ही को पुकार रही थी |" वे बोली- "पर मैं तो दादी नहीं ,अम्मा हूँ |" वे हमारी ही नहीं ,मोहल्ले की अम्मा हैं -'जगत-अम्मा' हैं, उनके अम्मापन मे...