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Showing posts from December, 2017

नव वर्ष

वर्ष का आखिरी महीना है , काम का जोर कुछ ज्यादा ही रहा | नीरज हमेशा अपने काम के प्रति वफादार रहा |ऑफिस में अपने सहयोगियों के साथ व्यवहार भी मिलनसार ही रहा है |पर , आज जरा सी चूक से टेंडर पास नहीं हुआ | कंपनी को काफी नुकसान हो गया | काफी रात बीत चुकी है , पर नीरज की आँखों से नींद गायब ही है | कानों में बॉस के ताने गूंज रहे हैं -' नीरज , तुमसे एक काम ढंग से नहीं हो पाया | अब तुम्हें रिटायर हो जाना चाहिए | इस से तो बेहतर यही होता मैं यह जिम्मेदारी सुरेश को ही सौंप देता |' तानेबाजी ,कड़वे बोलों के द्वारा अवहेलना एवं नफ़रत जाहिर हो ही जाती है |नींद तो आ नहीं रही , नीरज कमरे में चहलकदमी करने लगा | शीशे के सामने खड़ा हो गया -' क्या मैं उम्रदराज हो गया ? सुरेश मुझसे जूनियर है , वह खुद मुझ से सुझाव लेता है |' घडी देखी -'अभी तीन ही बजे हैं | मेरी आवाज से नीना की आँख खुल जायेगी |' नीरज लेट गया | फिर आँख ऐसी लगी कि नौ बजे ही खुली | बिटिया कॉलेज जा चुकी | उठा, अखबार पर निगाह डाली,पर टिकी नहीं | नीना चाय- बिस्किट ले आई | दोनों ने साथ में चाय पी | नीना बोली -" आज मैं...

पदचाप

यह कैसी फैली दूर तक तन्हाई . निःशब्द खामोशी क्यों है छाई ? गहरे सन्नाटे से मैं हूँ डरती , पदचाप सुनने को बैचेन रहती | यह बहती पवन, पत्तों की सरसराहट , किसी प्रतीक्षा में चौकन्ना कर देती आहट | माँ, तेरे पदचापों को हूँ जान गई , तेरे आने से बालपनी सुख पा गई | मेरे कानों को दे देती दस्तक,तेरे मन की बात , क्या तेरे मेरे बीच है कोई अदृश्य तार ? अपने आँचल में है तूने मुझे छिपाया , तपती धूप में है तू प्यार की पावन माया | ये पतझड़ में बहार है कैसे आई ? मेरे बच्चे के आने की आहट दी सुनाई | जिंदगी में मैंने जानी मोह, ममता की माया , तेरे नटखट सवालों ने मुझे नया पाठ सिखाया | मनमोहक , निश्छल मीठी है तेरी पहचान , उदासी में आशा का संचार है तेरी मुस्कान | दरवाजे की चौखट पर तकती ये दो आँखें , 'उन' की आने की आहट देते ये हवा के झोंके | ए प्रिय , एक उम्मीद -तेरे पदचाप ले कर आती है | जज्बातों का अहसास दिला देती है | मनुहार , तकरार , परवाह ,सभी है इस बंधन में , एक सजीला-सा विश्वास, मानो कोई...

स्वार्थ

' सीमा , उठ बेटा , 6 बज गए | मैं जा रही हूँ | तेरे पापा के लिए काढ़ा बना दिया है | दवाई सिरहाने रखी है | खाना भी तैयार कर दिया है | दोपहर कम्प्यूटर क्लास में जाने से पहले भैया और पापा को खाना खिला देना | चल , गेट बंद कर ले | '- कहते - कहते इंदु घर से निकल गई | तड़के उठकर घर के सारे काम करना इंदु की आदत हो गयी है | रोज घर से निकलकर मंदिर जाती | भगवान् से प्रार्थना करती - ' बड़ी बहूजी का स्वास्थ्य सदा इसी तरह बना रहे ,उनकी उम्र लम्बी हो ताकि उनकी सेवा से मेरा परिवार पलता रहे |' दो वर्ष पूर्व सेठ जी का देहान्त हो गया था | देहांत से पूर्व सेठजी सारी संपत्ति अपनी पत्नी अर्थात् बड़ी बहूजी के नाम कर गए | साल भर से बड़ी बहूजी अस्वस्थ ही हैं | दो बेटों का परिवार है , लम्बा चौड़ा व्यवसाय है , बड़ी कोठी है | बड़ी बहूजी का कमरा भी सुविधा संपन्न है | वसीयत के अनुसार जब तक वे जिन्दा हैं , मालिकाना हक उन्ही का रहेगा | घर में सभी में प्रेम है , पर बड़े घर में दूर - दूर कमरों में बनी निजता से निहित प्रेम कम ही उजागर हो पाता है | साल भर से इंदु सुबह सात बजे बड़ी बहूजी की सेवा म...