यह मकान दिनेश ने बहुत तरीके से और सुविधाजनक बनवाया है। एक कमरे में टांड़ बना हुआ है। साल भर, बहुत कम काम आने वाला सामान इसमें रख दिया जाता है। दिन में घर का दरवाजा और खिड़की हमेशा खुले ही रहते हैं, मां- पिताजी आगे के कमरे में बैठे ही रहते हैं। दिशा ने गौर किया- गर्मी बहुत हो रही है, अब रसोई में मटका रखना पड़ेगा। टांड़ पर मटका रखा हुआ है। दिशा ने सीढ़ी लगाई और टांड़ में जा कर मटका खोजने लगी।। दिशा को किसी के कुसमुसाने की आवाज आई, वह घबरा गई। चारों तरफ नजर दौड़ाई। एक टोकरी में बिल्ली के 4 नवजात बच्चे हैं। हे भगवान, यहां बिल्ली कब आई और कब बच्चे जन गई? कुदरत का करिश्मा देखो- न अस्पताल भागी, न डॉक्टर, न दाई की मदद ली। कितनी सुरक्षित जगह ढूंढ कर प्रसव किया। पर माँ दिख नहीं रही है। दिशा मटका ले कर नीचे आ गई। वह जानती है- अपने बच्चों को संभालने माँ जल्दी ही आएगी। दिशा ने हॉल में आकर माँ बाबूजी को बता दिया। दोनों मुस्करा दिए, बाबूजी बोले -"खिड़की के रास्ते से बिल्ली आई होगी, बच्चों को ले जाएगी। दिशा तुम धीरे से टोकरी को नीचे ले आओ और पलंग के बगल में रख दो, उसे बच्चे ले जाने में आसानी होगी। हाँ, खिड़की खुली रखना। कमरे का दरवाजा थोड़ा ढाल देना। बाबूजी के कहे अनुसार दिशा ने कर दिया। मुड़ी ही थी, देखा- बिल्ली खिड़की के डंडों के बीच बैठी है। दिशा से उसकी नजरें मिली। शायद बोलना चाह रही हो- तुमने मेरा काम आसान कर दिया। उसने एक बच्चे को मुँह में दबाया और चली गई। यह अपने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जा कर परवरिश करेगी।।
दिशा रसोई में काम करने लगी। स्कूल से दोनों बच्चों के आने का समय हो रहा है। करीब एक घंटे बाद दिशा कमरे में आई , देखा- बिल्ली दो बच्चों को ले जा चुकी है। स्कूल से बच्चे आ गए। दिशा ने बच्चों को बताया-' तुम्हारे कमरे में बिल्ली के बच्चे हैं, अभी वहाँ नहीं जाना।' इतने में ' म्याऊं' आवाज आई। कमरे के दरवाजे की आड़ में बच्चों ने देखा- बिल्ली अपने तीसरे बच्चे को मुँह में दबा कर ले जा रही है। बच्चों के लिए यह दृश्य कौतुभ भरा था। मौका पाकर दिशा बच्चों के कमरे में से उनके कपड़े और पढ़ाई का सामान ले गई। अभी टोकरी में एक बच्चा रह गया था। शाम हो गई। दिनेश भी घर आ गए। अब बच्चा धीमी धीमी आवाज निकाल रहा था। शायद वह भूखा हो। तीन घंटे से बिल्ली आई नहीं थी। रात होने को है। दिनेश और दिशा को चिंता हो गई- ठंड और भूख से बच्चा दम न तोड़ दे। दिशा बच्चे के लिए कटोरी में दूध ले आई। रुई का फोहा दूध में डुबो कर कुछ बूंदे बच्चे के मुँह पर निचोड़ दी। चार पाँच बूंदें बच्चे के मुँह में गई होंगी, थोड़ी हलचल हुई। घर के बच्चों को उस नवजात की हर प्रतिक्रिया खुशी दे रही थी। बच्चे के मुँह में दूध जाने से ये दोनों रोमांचित हो गए। फिर थोड़ी देर बाद दिशा ने रुई के फोहे से दूध की कुछ और बूंदे बच्चे के मुँह में डाल दी। उस पर चादर ढक दी।
रात बाबूजी ने खिड़की बंद करवा दी। कहीं दूसरी बिल्ली आकर इस बच्चे को नुकसान न पहुँचा दे। घर में सभी को इस नवजात से लगाव हो गया और बिन माँ के होने के कारण सहानुभूति अलग। सुबह आँख खुलते ही, घर के सभी सदस्य चादर हटा कर इस बच्चे को देख गए, मानो गुड मॉर्निंग कहने आए हों। आज रविवार है, बच्चों को किसी काम की जल्दी नही। बच्चों ने झट से खिड़की खोल दी। बिल्ली दस्तक तो दे नहीं सकती- बल्कि बंद खिड़की देख परेशान न हो जाय। इधर बच्चा दूध की कुछ बूंदों से अतृप्त जीवन जी रहा था। दिशा सोचने लगी- ' कैसी माँ है, तीन बच्चों को ले गई, चौथे की फिक्र ही नहीं! घर में सभी अपने अपने काम में लग गए। दिशा को बिल्ली के आने का आभास हुआ। बिल्ली खिड़की पर बैठी थी,दिशा को देख कर वह रुकी, फिर बच्चे के पास गई, पंजे से चादर को हटाया, बच्चे को सूंघा, फिर चाटने लगी। माँ का स्पर्श पा कर बच्चे में काफी हलचल आ गई, मानो अपनी खुशी जाहिर कर रहा हो। बिल्ली ने अपने बच्चे को मुँह में दबाया-दिशा को अपलक देखती रही। वह खिड़की पर चढ़ गई, फिर मुड़ कर देखा, मानो कह रही हो- एक माँ ही दूसरी माँ की चिंता को समझ सकती है। दिशा ने दोनों हाथ जोड़कर उसका धन्यवाद स्वीकार कर लिया, और कहा- तू भी एक माँ है- तेरी आंखों में ममता और कृतज्ञता के भाव साफ दिखाई दे रहे हैं।- 13 अप्रैल 2022
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