4 वर्षीया अंशु ,स्कूल की छुट्टी हो गई है , गेट के पास खड़ी है | आज उसे लेने दादी नहीं आई , मम्मी आई हैं | अंशु को दादी का साथ अच्छा लगता है - न रोक ,न टोक , न कोई बंदिशें , बस फरमाइश ही फरमाइश | प्रायः अंशु सड़क पर पड़े एक पत्थर को जूते से उछालती हुई घर तक ले आती है | कभी नाचती हुई चलती है , कभी पूरे रास्ते स्कूल के किस्से ही सुनाती रहती है , मानो वे दादी नहीं सहेली हों | उसकी बातों पर वे मुस्कराती रहती हैं , परन्तु मम्मा को तो अंशु की शैतानियों पर बहुत गुस्सा आता है , डांटती ही रहती हैं | मम्मी तो हर काम में नियम बना देती हैं , लकीरें खींच देती हैं , उसे पार करना मतलब गुनाहगार | आज तो अंशु को चुपचाप रहना होगा , सीधे-सीधे चलना होगा | अंशु ने पूछा-" मम्मा , आज दादी क्यों नहीं आई ?"
" दादी डेंटिस्ट के गई हैं |"
उसे याद हो आया, पहले भी एक बार दादी पापा के साथ डेंटिस्ट के गई थी | पापा कह रहे थे -' अम्मा के दांत हिल रहे है ,निकालने ही पड़ेंगे |' अंशु घर घुसी, घर में हलवा बनाने की खुशबू बड़ी अच्छी लग रही है| पिछली बार दादी डेंटिस्ट के गई थी तो मम्मा ने लापसी बनाई थी | आज हलवा बना है | वाह , दादी के दांत के इलाज में हलवा , लापसी खाने को मिलेगा |
थोड़ी देर में दादी आ गई | दादी ने अंशु को प्यार किया पर कुछ बोली नहीं | आज तो खाना बहुत अच्छा लगा | खाना खाने के बाद वह दादी से चिपट कर लेट गई | इस उम्र की जिज्ञासा अद्भुत होती है | पूछ ही लिया- "आपको बहुत दर्द हो रहा है ? "
दादी ने सिर हिलाया |
" आप डेंटिस्ट अंकल के पास बहुत बार जाओगी !"
दादी ने पुनः सिर हिलाया |
"अब आप दांत तुड़ाने कब जाओगी ?
दादी मुस्करा दी-" क्यों ?"
अंशु हंस कर बोली -" हलवा खाने को मिलेगा ना !"
चाय का पानी उबल रहा है-पास खड़ी प्रतिभा का ध्यान कहीं और है, विचारों के तूफान में फँसी हुई है | बिटिया मिता की आवाज़ ने चौंका दिया- 'माँ, किस के लिए काढ़ा बना रही हो ? ' 'अरे , नहीं चाय बना रही हूँ|' कह कर प्रतिभा ने चाय पूरी बनाई और छानकर परेश के सामने रख दी| आज रविवार है-मिता और दीप की छुट्टी है पर परेश के लिए तो रविवार- सोमवार एक समान ही हैं | सातों दिन एक से हो तो 365 दिनों में कोई दिन खास हो सकता है यह कैसे मान लिया जाय ! परेश का सुबह घर से जाना और रात को लौट कर आना- वही प्रतिभा ...वही घर....वही दीवारें ....वही सन्नाटा ..| जिन्दगी में मानो नीरसता आ गई है | एक ठहराव आ गया है जो पीछे मुड़ कर देखने को विवश कर ही देता है | मिता 5 वर्ष की और दीप 8 वर्ष का , सास- ससुर साथ में ही थे | घर के कामों स...
Comments
Post a Comment