जरूरत नहीं उम्र को ढंक दूँ खिजाब से,
रिश्तों की गहराई नापी है मैंने उम्र से।
किसी प्याले की कुव्वत कहाँ बहका सके मुझे,
धुन है, जज्बा है-प्यार का,जिसने बाँधा मुझे।
क्यों कर गुजारें जवानी मयखानों में,
खो देते होश-हवास, जब डूब जाते नशे में।
परिवार तबाह करता यह जुए का नशा,
दीवानगी दिखाती दौलत,शोहरत का नशा।
नशा है स्मार्टफोन पर जुटे रहने का,
नशा है घंटों बतियाते रहने का ।
नशा है लोगों के लाइक्स देख हर्षाने का ,
नशा है चेटिंग का , फ्लेर्टिंग का।
रिश्ते का जुनून हो नशा हो प्यार में,
धन-मन समर्पित हो , ऐसा नशा हो संसार में,
मंदिर-मस्जिद,धर्म-जात के नाम पे न लड़े इंसान,
ढोंगी बाबा और नेताओं बंद करो देना अपना ज्ञान।
आज घर में चारों तरफ शोर हो रहा है | माहौल बहुत खुशनुमा है | हो भी क्यों ना ! आज अम्मा अस्पताल से आ रही हैं | गत माह अम्मा को पीलिया हो गया था | भैय्या की शादी थी- बस बदपरहेजी हो गई और पीलिया बिगड़ गया | शादी के तुरंत बाद ही अम्मा को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा | पूरे एक माह बाद अम्मा का घर आना सभी को अच्छा लग रहा है | मुझे अच्छी तरह याद है | एक दिन मेरी सहेली स्मिता की देखादेख मैंने अम्मा को ' दादी ' कह कर पुकार लिया | उन्होंने अनसुना कर दिया | मैं उनके पास गई और पल्ला पकड़ कर बोली -"मैं आप ही को पुकार रही थी |" वे बोली- "पर मैं तो दादी नहीं ,अम्मा हूँ |" वे हमारी ही नहीं ,मोहल्ले की अम्मा हैं -'जगत-अम्मा' हैं, उनके अम्मापन मे...
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