जरूरत नहीं उम्र को ढंक दूँ खिजाब से,
रिश्तों की गहराई नापी है मैंने उम्र से।
किसी प्याले की कुव्वत कहाँ बहका सके मुझे,
धुन है, जज्बा है-प्यार का,जिसने बाँधा मुझे।
क्यों कर गुजारें जवानी मयखानों में,
खो देते होश-हवास, जब डूब जाते नशे में।
परिवार तबाह करता यह जुए का नशा,
दीवानगी दिखाती दौलत,शोहरत का नशा।
नशा है स्मार्टफोन पर जुटे रहने का,
नशा है घंटों बतियाते रहने का ।
नशा है लोगों के लाइक्स देख हर्षाने का ,
नशा है चेटिंग का , फ्लेर्टिंग का।
रिश्ते का जुनून हो नशा हो प्यार में,
धन-मन समर्पित हो , ऐसा नशा हो संसार में,
मंदिर-मस्जिद,धर्म-जात के नाम पे न लड़े इंसान,
ढोंगी बाबा और नेताओं बंद करो देना अपना ज्ञान।
अब तक आपके जीवन में भी कई घटनाएँ घटी होगी ,जिन्हें याद करके कभी आप रो पड़ते होंगे , तो कभी अनायास आपके होठों पर हल्की मुस्कान आ जाती होगी | मेरे जीवन में भी एक रोचक घटना घटी जो कि मेरे लिए काफी प्रेरणास्पद रही , जिसे में कभी भूल नहीं सकती | सच कहूँ तो इस घटना ने मुझे नानी याद दिला दी , दाल- रोटी के सब भाव मालूम पड़ गए | 1975 में गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थी | राशन की बड़ी हायतौबा मच रही थी | मालूम पड़ा - फलाने दिन दुकान पर राशन आने वाला है , पर भेजा किसे जाय ? माताजी सबकी तरफ प्रश्न भरी निगाहों से देखने लगीं | राशन लाना ,मतलब पूरा दिन लगा देना | नौकर ने गौने के लिए यही दिन उचित समझा अतः छुट्टी ...
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