आज भागती जिन्दगी अर्थात् FAST LIFE में 'हाय ' 'हैलो 'कहने की प्रथा है ' नमस्ते' अब कौन कहता है , करता है ! गर्दन को थोडा झुकाकर हाथों को जोड़कर नमस्ते करना - एक पुरानी सी बात हो गई है | अभिवादन का तात्पर्य है- GREETING . यदि हम 'हैलो' कह कर भी किसी का अभिवादन करते हैं तो सामने वाले इंसान को उसकी अहमियत का अहसास होता है | हम राह चलते हर व्यक्ति को तो नमस्ते करते नहीं या हैलो कहते नहीं ! आपने गौर किया होगा-यदि हम किसी से नाराज़ होते हैं तो उस से नज़रें चुराकर पास से निकल जाते हैं | अभिवादन वो दरवाजा है जिसे बंद कर के हम इस गुमान में आ जाते हैं कि हम ने उस व्यक्ति के वजूद को नकार दिया- सच माना जाय तो हमनें स्वयं को धोखा दिया है |
यदि हम किसी परिचित को देख कर नहीं मुस्कराए तो उसकी झोली में ख़ुशियाँ कम नहीं हुई बल्कि एक फूल हमारे पास ही रह गया जो कि वीरान में पड़ा कभी कुम्हला जायेगा | किसी डाली पर खिलना , मुस्कराना , इठलाना और अंततः कुम्हलाना , मुरझाना हर फूल की नियति है | यदि यही फूल किसी के मुस्कान का कारण बन जाय तो इसका खिलना ही सार्थक बन जाता है | मुस्कराहट एक व्यापक भाषा है | एक हाथ को हवा में हिला कर 'हाय ' कहो - या सामने वाले के हाथ में हाथ थाम कर 'हैलो' कहो - हर तरह का अभिवादन मुस्कान भरा हो -यही हमारी भारतीय परम्परा है |
यदि हम किसी परिचित को देख कर नहीं मुस्कराए तो उसकी झोली में ख़ुशियाँ कम नहीं हुई बल्कि एक फूल हमारे पास ही रह गया जो कि वीरान में पड़ा कभी कुम्हला जायेगा | किसी डाली पर खिलना , मुस्कराना , इठलाना और अंततः कुम्हलाना , मुरझाना हर फूल की नियति है | यदि यही फूल किसी के मुस्कान का कारण बन जाय तो इसका खिलना ही सार्थक बन जाता है | मुस्कराहट एक व्यापक भाषा है | एक हाथ को हवा में हिला कर 'हाय ' कहो - या सामने वाले के हाथ में हाथ थाम कर 'हैलो' कहो - हर तरह का अभिवादन मुस्कान भरा हो -यही हमारी भारतीय परम्परा है |
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