* गैर को अपना बनाने की अदा जाती रही ,
दिल की महफिल को सजाने की अदा जाती रही |
कीमती कालीन जब से मेरे घर में आ गए ,
बेहिचक घर आने जाने की अदा जाती रही |
बाथरूमों की नई कल्चर में ऐसा बंद हूँ ,
खुल के बारिश में नहाने की अदा जाती रही |
वक्त ने कुछ ऐसे छीने प्यार के लम्हे ,
रूठने की और मनाने की अदा जाती रही |
* एक ही गलती , सारी उम्र करते रहे ,
धूल चेहरे पे थी , हम आइना साफ करते रहे |
* सब चाहते हैं मंजिलें पाना चले बगैर ,
जन्नत भी सभी को चाहिए मरे बगैर |
* हर शख्श दौड़ता है यहाँ भीड़ की तरफ ,
फिर ये भी चाहता है , उसे रास्ता मिले |
दिल की महफिल को सजाने की अदा जाती रही |
कीमती कालीन जब से मेरे घर में आ गए ,
बेहिचक घर आने जाने की अदा जाती रही |
बाथरूमों की नई कल्चर में ऐसा बंद हूँ ,
खुल के बारिश में नहाने की अदा जाती रही |
वक्त ने कुछ ऐसे छीने प्यार के लम्हे ,
रूठने की और मनाने की अदा जाती रही |
* एक ही गलती , सारी उम्र करते रहे ,
धूल चेहरे पे थी , हम आइना साफ करते रहे |
* सब चाहते हैं मंजिलें पाना चले बगैर ,
जन्नत भी सभी को चाहिए मरे बगैर |
* हर शख्श दौड़ता है यहाँ भीड़ की तरफ ,
फिर ये भी चाहता है , उसे रास्ता मिले |
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