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सूनापन

                                               रमा के पड़ोसी शर्मा जी के 3 बेटे हैं | शर्मा दम्पत्ति को हमेशा गुमान रहा कि उनके 3 बेटे हैं , कोई बेटी नहीं | बेटे बड़े हो गए हैं | कोई कॉलेज में पढ़ रहा है तो कोई कोचिंग में जाता है | श्रीमती शर्मा पूरे दिन घर को व्यवस्थित करने और बेटों के फैले कामों को बटोरने में लगी रहती हैं | इनके घर में पुरुष-बहुलता होने के कारण सभी के विचारों में अहम् टपकता ही है | व्यावहारिकता में भी ये लड़के स्त्रियों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं क्योंकि इन्होंने ' बहन ' के रिश्तों को कभी जाना ही नहीं !

                                                आज रक्षाबंधन है - राजस्थानी परिवार होने के कारण रमा के यहाँ इस त्यौहार को अलग अंदाज से मनाया जाता है | हॉल में दोनों भाई , दोनों भाभी , दोनों भतीजियाँ - रीना और टीना एवं दोनों भतीजे -राकेश और मुकेश सजधज कर बैठे हैं | रमा ने राखी के लिए थाली सजा रखी है | अचानक घर की घंटी बजी -' अरे , मिसेज शर्मा आइये -आइये | '- कह कर रमा की माँ ने उनका स्वागत किया | वे भी हॉल में बैठ गई | रमा ने माँ के इशारे पर दोनों भाईयों के तिलक लगाया , राखी बाँधी और मिठाई खिलाई | अब दोनों भाभियों को तिलक लगाया और चूड़ी में सुन्दर से लुम्बे लटका दिए | रमा रीना की तरफ मुड़ी , इधर  राकेश चिल्ला पड़ा - ' बुआ यह चीटिंग है | आपने पहले पापा और चाचा को राखी बांधी, बाद में मम्मी और चाची को | तो अब पहले हमारे राखी बंधनी चाहिए | ' पर रमा ने हँसते हुए रीना और टीना  की चूड़ियों में लुम्बे लटका दिए और फिर राकेश और मुकेश की कलाई पर राखी बांधी | अब रीना और टीना ने भी अपने भाईयों को राखी बांधी |
         
                                                    घर में हंसी-ठिठोली चलती रही | पकवान की खुशबू भी आ रही थी | श्रीमती शर्मा यह सब देख रही थी , अनायास मुँह से निकल पड़ा - "सच , हर रिश्ते की अपनी एक अहमियत होती है |  आज का त्यौहार हिन्दुस्तानी भाई- बहनों का त्यौहार है -इसमें रिश्ते और जज्बातों की मिठास भरी है | पर मेरे घर में तो यह त्यौहार सूना ही है | मन उचट रहा था इसलिए आपके यहाँ चली आई |"

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