मैं समय हूँ , सृष्टि के बराबर उम्र मेरी ,
सदा रही, सदा रहेगी , हुकूमत मेरी |
पल , दिन , साल मेरा बोध कराती ,
भागता हूँ , पर पदों की आवाज नहीं आती |
मुट्ठी में रेत को न रोक सकोगे ,
भला मुझे कैसे टोक सकोगे |
मेरी निरंतरता , शाश्वतता को पहचानो ,
मेरे निष्पक्ष व्यवहार को जानो |
गुजरा वक्त याद ही बन जाता है ,
आता वक्त एक ख्वाब ही होता है |
वर्तमान ही बस मैं ' समय ' हूँ ,
' आज ' ही मैं ' कालजयी ' हूँ |
हर युग के इतिहास का साक्षी हूँ ,
सोने - चाँदी के सिक्कों का गवाह हूँ |
पाइ , आना ,चवन्नी , को जाते देखा ,
तो २००० के नोटों को आते भी देखा |
मैंने पनघट में पानी की गगरी भरते देखा ,
नल से भी पानी को टपकते देखा |
अब बोतल में पानी को बिकते देख रहा हूँ ,
इस अमृत का निरादर देख उदास हूँ |
जब गलती इन्सान कर जाता है ,
वह इल्जाम मुझे दे जाता है |
कटघरे में खुद को खड़ा पाता हूँ ,
और वह बरी हो जाता है |
पीड़ा के झंझावत में मुझे न फंसाओ ,
समय के साथ खुद ही बदल जाओ |
तकाजा है वक्त का तूफां से जूझो ,
कहाँ तक चलोगे किनारे -किनारे ....बूझो |
सदा रही, सदा रहेगी , हुकूमत मेरी |
पल , दिन , साल मेरा बोध कराती ,
भागता हूँ , पर पदों की आवाज नहीं आती |
मुट्ठी में रेत को न रोक सकोगे ,
भला मुझे कैसे टोक सकोगे |
मेरी निरंतरता , शाश्वतता को पहचानो ,
मेरे निष्पक्ष व्यवहार को जानो |
गुजरा वक्त याद ही बन जाता है ,
आता वक्त एक ख्वाब ही होता है |
वर्तमान ही बस मैं ' समय ' हूँ ,
' आज ' ही मैं ' कालजयी ' हूँ |
हर युग के इतिहास का साक्षी हूँ ,
सोने - चाँदी के सिक्कों का गवाह हूँ |
पाइ , आना ,चवन्नी , को जाते देखा ,
तो २००० के नोटों को आते भी देखा |
मैंने पनघट में पानी की गगरी भरते देखा ,
नल से भी पानी को टपकते देखा |
अब बोतल में पानी को बिकते देख रहा हूँ ,
इस अमृत का निरादर देख उदास हूँ |
जब गलती इन्सान कर जाता है ,
वह इल्जाम मुझे दे जाता है |
कटघरे में खुद को खड़ा पाता हूँ ,
और वह बरी हो जाता है |
पीड़ा के झंझावत में मुझे न फंसाओ ,
समय के साथ खुद ही बदल जाओ |
तकाजा है वक्त का तूफां से जूझो ,
कहाँ तक चलोगे किनारे -किनारे ....बूझो |
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