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मन के रंग

                                            हर 2 मिनट में मेरी निगाहें घड़ी पर पहुँच जाती , आज सुबह के 10 बज गए | स्मिता और संगीता दोनों बेटियाँ कॉलेज चली गई और श्रीमान दफ्तर चले गए , पर मीना का कोई अता-पता नहीं | रोज सुबह 9 बजे आ जाती थी - कहीं आशा बीमार तो नहीं हो गई | कल ऐसा लगा तो नहीं ! दरअसल मुझे मीना से ज्यादा आशा का इन्तजार होने लगा है | मीना - मेरे घर के भीतर के काम सँभालने वाली परिचारिका और आशा - उसकी चार वर्षीया बेटी | रोज मीना आशा के साथ सुबह 9 बजे आ जाती और शाम 4 बजे लौट जाती | इस बीच घर की साफ - सफाई , खाना बनाना ,घर के सारे काम संभल लेती और आशा मेरे इर्द - गिर्द ही घूमती रहती | 6 महीने हो गए  - इसकी मीठी बातें और हंसी से मेरा दिन का एकाकीपन भर - सा गया | इससे लगाव भी हो गया , इसलिए इन्तजार रहता है |
                                             घर की घंटी बजी | देखा माँ - बेटी खड़ी हैं | दोनों ने नमस्ते किया | मीना बोली - "दीदी , आज घर में मेहमान आ गए थे , इसलिए देर हो गई | "
" कोई बात नहीं | "
आशा अपनी फ्रॉक के घेर को फैलाकर गोल घूमते हुए बोली - " आंटी , मैंने नई फ्रॉक पेनी है | मेरे चाचा लाए | "
" वाह , तू तो बहुत प्यारी लग रही है | "
बस उसकी हंसी उसके मुख पर नूर ले आई | खिलखिलाती  हुई अन्दर गई और अपना थैला उठा लाई | इसमें कुछ कॉपी , किताबें , स्लेट आदि हैं | इसे कुछ अक्षर - ज्ञान होने लगा है | थैले के अन्दर से एक डब्बी निकाली, खोल कर बोली - " आंटी , ये कंचे गिनूँ | " एक-दो-तीन .......अंकों का क्रम मेरे कानों में पहुँच  रहा है | कल ही स्मिता आशा के लिए एक ड्राइंग बुक और मोम के रंग लाई थी | मैंने लाकर आशा के सामने रख दी | इसके चेहरे पर 100 वाट के बल्ब की - सी चमक देख कर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई |
" ये मेरे लिए ? "
हाँ , हाँ , तेरे लिए ! इसमें इस पन्ने पर नदी है , आसमान है , नाव है , पास में हाथी खड़ा है | ये रंग हैं , तुझे इनमें रंग भरना है | "
                                                  बस , किताब और रंग उसे पकड़ा कर मैं रसोई में मीना के पास चली गई | काफी देर बाद आशा के पास लौटी , तो देखती हूँ - आसमान का रंग गुलाबी , पानी का रंग बैंगनी , लाल रंग की नाव और नील रंग का हाथी | नदी तो आसमान अक्स होती है , फिर भला दोनों का रंग अलग - अलग कैसे हो सकता है ! मैंने ही पूछा - " आशा , तूने नदी और आसमान में अलग - अलग रंग क्यों भरा ? "
" आंटी , यह मेरी नदी है , मेरा आसमान है , मुझे जो अच्छे लगेंगे , उसी रंग के होंगे | "
" और हाथी तो काले रंग का होना चाहिए था | "
" अरे नहीं , मेरा हाथी नहाया - सा लग रा है | "
 इसकी स्पष्टवादिता से मैं मुग्ध हो गई | अपनी दुनिया बनाने का उसे मौका मिला था , सो बेझिझक हो कर इसने अपने मन का रूप - रंग दे दिया | मैं निरुत्तर थी | सच जिन्दगी रचने में आजाद ख्याल बहुत मायने रखते हैं और इन बच्चों से कोई सीखे ख़ुशी का संक्रमण कैसे फैलता है |

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