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व्हाट्सअप

                                               व्हाट्सअप में हम सहेलियों का ग्रुप बड़ा सक्रिय और मनोरंजक हो गया है | राजश्री के चुटकुले पढ़ते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है , तो माधवी कवीयों के चुने हुए पद्द्यांश ही व्हाट्सअप कर देती है , जिन्हें मैं शेयर करे बिना नहीं रह पाती हूँ | सुनीता को राजनीति के हास्यास्पद कार्टून या छीटाकशी के वाकये ही पसंद है | सुनिधि के व्हाट्सअप तो दिल को छू देते हैं | रिश्तों की अहमियत , रिश्तों में मिठास , माता पिता के प्रति सम्मान के उसके मैसेज बहुत अच्छे लगते हैं | आज के भागदौड़ की जिन्दगी में रिश्तों को इतना महत्त्व कौन दे पाता है ! सुलझी सोच , संवरा व्यक्तित्व और प्रबुद्ध दृष्टिकोण यही काफी है - अपना प्रभाव छोड़ने के लिए | एक तरह से कहा जाए व्हाट्सअप के बीच समय अच्छा बीत जाता है और समीपता बनी रहती है | जब 3-4 सहेलियाँ ऑनलाइन हों तो रोचक वार्ता भी छिड जाती है | मुट्ठी बंद अंगूठा ऊँचा दिखा कर - पसंद होने का आभास कराना , तरह -तरह के चेहरे दिखाकर अपने भावों को प्रकट करना , कम में बहुत कह देने का अहसास कराना - एक कला हो गई है |
                                                  यहाँ काफी दिनों से ग्रुप में सुनिधि का व्हाट्सअप नहीं आया | मुझे उसके मैसेज की कमी खल रही थी | मैंने उसके नंबर पर व्हाट्सअप किया - ' शहर से बाहर हो क्या ? '
जवाब आया - ' यहीं हूँ | साँस लेने की फुरसत नहीं | रूटीन ही गड़बड़ा गया है | '
' क्या हुआ ? सब ठीक है ना ! '
' यार , बूढ़े - बुढ़िया आए हुए है ना | '
' कौन ? '
' मेरे सास - ससुर | '
                                                 इसके बाद मैंने कुछ जानना नहीं चाहा | सुनिधि के शब्दों के प्रयोग ने मेरी भावनाओं को ठेस पहुंचाया | उसके द्वारा व्हाट्सअप में डाले गए मैसेज आँखों के आगे घूमने लगे | रिश्तों के प्रति संवेदनशील उपदेश देने वाली अपने ही घर में बुजुर्गों को उपेक्षित कर रही है |  उसके माता - पिता उसके घर आते तो क्या रूटीन नहीं गडबडाता ! कहीं उसकी निगाह में माता - पिता और सास - ससुर के सम्मान में अंतर तो नहीं !
                                               जाहिर सी बात है - फॉरवर्ड मैसेजेस से इंसान के स्वभाव और व्यक्तित्व को तय कर लेना - हमारी गलतफहमी है |

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