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सपना - अपना (भाग 2)

कमाया हुआ धन , परिवार की माया ,
हरे भरे बाग़ , माता पिता की छाया |
            - अब बन गया एक सपना |


अब छोड़ो , हुई यह बात पुरानी ,
इसमें है न कोई दम , यह मैंने जानी |
अब आया , ' हाय - हैलो ' का ज़माना ,
कह दो भैय्या , इसे मॉडर्न ज़माना |
             - इसे ही कहो अपना |
एकल परिवार , व्यस्त माता - पिता ,
अब रहा न कोई राम , न कोई सीता |
दंगा - फसाद , ये रोज के लफड़े ,
बढ़ते सपने , घटते कपडे |
            - इसे ही कहो अपना |
इन्टरनेट से बन गयी दुनिया छोटी,
खा बर्गर पिज़्ज़ा , भूले रोटी |
दो दो मोबाइल सदा रहे साथ ,
 ले गर्लफ्रेंड के हाथों में हाथ |
            - इसे ही कहो अपना |
मानो मेरी बात ,सपने देखना छोड़ो ,
यथार्थ में जियो , ख़्वाबों को तोड़ो |
हम आप बन जाए कर्णधार ,
क्यों रहे देश बीच मझदार ?
           - इसे ही कहो अपना |
शिक्षा , संस्कार , प्यार के खोल दो खाते ,
विरासत में न होंगे खजाने रीते |
युवा पीढ़ी को दे दें यह वसीयत ,
होगी पूरी सब मुठ्ठी में कर लेने की चाहत |
            - इसे ही कहो अपना |

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