नारी की साड़ी , माँ का आँचल ,
दुल्हन का परदा , वो प्रेम के बोल |
माचिस की तिल्ली , मिट्टी का चूल्हा ,
एक टेलीफोन से जुड़ा पूरा मुहल्ला |
- अब बन गया एक सपना |
सीमित सपने , संयुक्त परिवार ,
लहराती चोटी , दादी का प्यार |
बाजरे की रोटी , गुड़ की मिठास ,
कलम -दवात और चिट्ठी की आस |
- अब बन गया एक सपना |
वो देश प्रेम , इंसानों में राम ,
निरोगी काया , बेरोजगारों को काम |
अनाज के ढेर , सर्कस और मेला ,
आदर - सत्कार , गुरु और चेला |
- अब बन गया एक सपना |
मनुष्य की आयु , आकाश में उड़ते पंछी ,
पड़ोसी अंकल की डांट भी लगती अच्छी |
गुल्ली - डंडा , खेल का मैदान ,
चुस्त - दुरुस्त , खिला - खिला मन |
- अब बन गया एक सपना |
सिलबट्टे की चटनी ,तीखा अचार |
रिवाजों का बंधन , धोंक नमस्कार |
कमाया हुआ धन , परिवार की माया ,
हरे भरे बाग़ , माता - पिता की छाया |
- अब बन गया एक सपना |
-क्रमशः......|
-जनवरी 2012 |
दुल्हन का परदा , वो प्रेम के बोल |
माचिस की तिल्ली , मिट्टी का चूल्हा ,
एक टेलीफोन से जुड़ा पूरा मुहल्ला |
- अब बन गया एक सपना |
सीमित सपने , संयुक्त परिवार ,
लहराती चोटी , दादी का प्यार |
बाजरे की रोटी , गुड़ की मिठास ,
कलम -दवात और चिट्ठी की आस |
- अब बन गया एक सपना |
वो देश प्रेम , इंसानों में राम ,
निरोगी काया , बेरोजगारों को काम |
अनाज के ढेर , सर्कस और मेला ,
आदर - सत्कार , गुरु और चेला |
- अब बन गया एक सपना |
मनुष्य की आयु , आकाश में उड़ते पंछी ,
पड़ोसी अंकल की डांट भी लगती अच्छी |
गुल्ली - डंडा , खेल का मैदान ,
चुस्त - दुरुस्त , खिला - खिला मन |
- अब बन गया एक सपना |
सिलबट्टे की चटनी ,तीखा अचार |
रिवाजों का बंधन , धोंक नमस्कार |
कमाया हुआ धन , परिवार की माया ,
हरे भरे बाग़ , माता - पिता की छाया |
- अब बन गया एक सपना |
-क्रमशः......|
-जनवरी 2012 |
Comments
Post a Comment