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करे कौन , भरे कौन !

                                   आज अखबार में पढ़ा - मन बहुत विचलित और आक्रोशित हुआ | स्कूल की बस का ड्राइवर इअरफोन पर गाना सुनते हुए बस चला रहा था |  मानव रहित क्रोसिंग पर से बस को ले जाते वक्त आती हुई ट्रेन को देख कर भी जल्दबाजी में पटरी पार करने की कोशश की | आश्चर्य की बात यह कि पटरी के पास गुजर रहे एक कर्मचारी के चिल्लाने पर भी ड्राईवर ने बस नहीं रोकी  | खुली आँखों से अनहोनी जान कर भी  उसने अपनी और बच्चों की जान दांव पर लगा दी , भला इयरफोन लगे बंद कानों से उस कर्मचारी की आवाज कैसे सुन पाता ! बस , बहुत बड़ा हादसा हो गया  | सभी असमय काल के आगोश में आ गए | दर्दनीय स्थिति उन अभिभावकों की हो गई , जिन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए एक सुरक्षित हाथ चुना था | एक लापरवाही से या यूँ कहे जानबूझ कर की गई गलती से कई घर के आँगन सूने हो गए |

                                     इयरफोन लगा कर चलना , सड़क पार करना , वाहन चलाना --एक फैशन हो गया है या 'स्टेटस सिम्बल ' बन गया है | क्या ये व्यक्ति स्वयं को बहुत ज्यादा व्यस्त जाहिर करना चाहते हैं ? इयरफोन न भी लगा हो तो गर्दन को टेढ़ा करके कान के नीचे मोबाइल को दबा कर बात करते हुए गाड़ी चालाना भी एक आम बात हो गई है | माना कि स्टेयरिंग पर आपका हाथ है ,ब्रेक पर आपका पैर है ,पर गर्दन तो बंध गई है , घुम नहीं सकती , जिस से बगल से आते जाते वाहनों पर निगाह रख सके | इस नादानी का खामियाजा दूसरों को भुगतना पड़ता है |

                                   जरुरत है इस ओर सचेत होने की | आज पानी सिर के ऊपर तक आ चुका है | अब समय नहीं रहा - इन शौकीनों को प्यार से समझाने का | सभी को मिल जुट कर इस गलती को जड़ से हटाना होगा | इस के लिए कठोर नियम बनाने होंगे | सड़क पर मोबाइल या इयरफोन का उपयोग दूसरों के लिए कष्टप्रद हो तो तुरंत मोबाइल जब्त कर लिया जाय या वाहन चलाते वक्त मोबाइल कर रहे हों तो लाइसेंस जब्त कर लिया जाय |

                                       बस , अब और हादसे .....नहीं बिलकुल नहीं ! जिंदगियों से खिलवाड़ अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं ...........!

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