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" टैक्सी से चालंगा "

                                             बात काफी वर्षों पुरानी है , पर याद मानो आज भी ताजा है | मोदानीजी के चार भाईयों के परिवार में बेटियाँ ब्याह लायक हो चुकी थी | लोकनाथ जी सबसे बड़े थे | सादगी एवं सज्जनता के वे प्रतिमूर्ति थे | लोकनाथ जी  की बहन सुशीला जी उनके साथ ही रहती थी | बेटियों की शादी की चिंता लोकनाथ जी से ज्यादा उनकी बहन को थी -या यूँ कहो बहन के चिंता करने के कारण लोकनाथ जी कुछ बेफिक्र थे |
                                           
                                             सुशीला जी एक स्कूल में अध्यापिका थी | प्रायः उस स्कूल में एक ब्राह्मणी कमला कई बच्चों को छोड़ने आया करती | शायद अपने मोहल्ले के सभी छोटे बच्चों को एक साथ स्कूल लाना कमला का ही काम था | ब्राह्मण परिवार की होने के कारण कमला का कई परिवारों  में आना जाना बना रहता था | एक दिन सुशीला जी ने कमला से कहा -" तेरी निगाह में कोई माहेश्वरी लड़का हो तो बताइये |" करीब 3 वर्ष बाद वही कमला संदेशा लाई | सुशीला जी ठंडी सांस ले कर बोली -" अरी , जिन भतीजियों के लिए कहा था , उनकी तो शादी हो चुकी | खैर ,अगली के लिए देख लेंगे | " अगली मतलब श्यामा |

                                               श्यामा बी .ए . फाइनल में थी और आगे पढ़ना चाहती थी | पर सुशीला जी घर आए रिश्ते को नकारना नहीं चाहती थी | वैसे भी उस समय लड़की को अपनी जिन्दगी का फैसला खुद लेने लायक नहीं समझा जाता था | फलां दिन श्यामा को पहली बार देखने आने वालों का समय तय हो गया | एक दिन पूर्व से ही तैयारियां शुरू हो गई | उस दिन लोकनाथ जी और उनके बेटे रोहित के सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए | श्यामा को भी कॉलेज जाने से मना कर दिया गया - जिससे चेहरा ' फ्रेश ' नजर आए | श्यामा को कुछ हिदायतें भी दी गई | मिठाई -नमकीन से ले कर पान-सुपारी तक का अच्छा खासा मीनू तैयार हो गया | सुशीलाजी के खास आर्डर पर जब पान पर चांदी के बर्क लगवाए गए तो श्यामा के मुँह से अनायास ही निकल पड़ा -" अभी तो पहली बार कोई आ रहा है, पता नहीं और कितने मौके ..........?"  वाक्य पूरा नहीं हुआ था ,बुआ की घूरती निगाहों ने श्यामा के चेहरे की हवाइयाँ उड़ा दी थी |

                                                खैर , वह समय भी आ गया | एक नवयुवक अपने भाई , बहन और एक बुजुर्ग के साथ पधारे | कुछ देर बातों का आदान-प्रदान चलता रहा | सलवार-सूट पहने , ढाई इंच की मुस्कान के साथ सीमा ने नाश्ता पेश किया | सीमा श्यामा की छोटी बहन है | आगंतुक सीमा को प्रश्न भरी निगाहों से देख रहे थे | अचानक नवयुवक के भाई ने राजस्थानी भाषा में नवयुवक से पूछा - " भाईजी , बस से चलोगा कि टैक्सी से ? " जवाब था - " ना भाया, बस से ही चालंगा | "

                                                इतने में लोकनाथ जी ने ऊँचे स्वर में कहा -"अरे , श्यामा को तो भेजो | " यहाँ फुसफुसाहट हुई - ' भाया, टैक्सी को किरायो लागतो दिखे | ' थोड़े ही पल बाद श्यामा कमरे में थी | परिचय लिया और दिया | कुछ प्रश्न इधर से , कुछ उधर से | फिर वह नवयुवक बोल पड़ा - " आपा तो टैक्सी से चालंगा | " पान खा लेने के बाद घर की देहरी पार करते वक्त पुनः सुनाई दिया - ' टैक्सी रोकिये | ' अतिथियों के जाने के बाद सभी के दिमाग में ' टैक्सी ' शब्द एक निरुत्तर प्रश्न बना हुआ था | ' टैक्सी ' शब्द से उस परिवार के स्वाभाव और परिस्थितियों पर कई विचार उठे जो कि घर में चर्चा का विषय बना रहा | हाँ, सुशीला जी और लोकनाथ जी उस युवक की शिक्षा और व्यावहारिकता से काफी प्रभावित थे |

                                                  अगले ही दिन उन्हीं के यहाँ से फ़ोन आया- ' हमें श्यामा पसंद है | ' पर श्यामा काफी परेशान थी , उसने तो अपनी शादी की परिकल्पना ही नहीं की थी और छः माह बाद  विकास और श्यामा के विवाह की तारीख तय हो गई | एक दिन विकास के पिता का फ़ोन आया -' लोकनाथ जी , हमारा बेटा विकास श्यामा से कुछ देर मिलना चाहता है | यदि आपकी इजाजत हो दोनों बच्चे कुछ देर घूम आएंगे |'

                                                    पार्क में मिलना तय हुआ | दोनों बैठे काफी देर बतियाते रहे | दोनों तरफ के परिवारों की बातें होती रही | श्यामा तो अपने दिमाग में एक प्रश्न दबाए बैठी थी | सहज लहजे से श्यामा ने पूछ ही लिया -"आप घर से यहाँ कैसे आए ? टैक्सी से या ....?"
विकास -" टैक्सी से आया हूँ |"
श्यामा -" तो आज आप दूसरी बार ही टैक्सी में बैठे क्या ?"
विकास -"क्या मतलब ?"
श्यामा - "आप उस दिन हमारे घर आए थे तो लौटने वक्त बार-बार टैक्सी का जिक्र कर रहे थे | क्या पहली बार टैक्सी में गए थे ?"
विकास बहुत जोर से हँसा और खुलासा किया -" उस दिन 'टैक्सी से जायेंगे ' यह हमारा कॉडवर्ड था | हम अपने घर से तुम्हारे घर तक बस से गए थे और यह तय हुआ था कि लड़की पसंद आ गई तो टैक्सी से ही लौटेंगे | तुम पसंद आ गई तो ...|"


                                                        श्यामा अपनी नासमझी और विकास की चुहल पर शरमा गई |

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