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क्या ये बदलाव अच्छे हैं?

आज राह चलते-चलते बदलते हैं मंजर,
कैसा आ गया है एक तूफानी बदलाव !
थम गए हैं मेरे कदम, लिए प्रश्न कई भीतर,
क्यों न मैं बदल सकी, रह गई अकेली।

समय के पृष्ठ पर लिखी इबारतें,
त्वरित गति से हो रहीं अदृश्य।
है चुनौती, इन इबारतों को हम पढ़ लें,
क्योंकि परिवर्तन का डस्टर है बड़ा गतिमान।

अतीत में जीना, जैसे पुराना नोट भुनाना,
लाख कर लें कोशिश, चल नहीं सकता।
बड़े कहें-भविष्य की कल्पना में मत फँसो,
जीवन तो नगद है, उधार नहीं।

'यूज़ एन्ड थ्रो' की अवधारणा,
भागमभाग और इंस्टेंट पाने की चाहत,
अंगूठे दे रहे 'लाइक्स' और 'थम्स अप',
और प्रतिक्रियाएं बदल रहीं हैं भावना।

दुर्घटनाओं के बन मूक दर्शक
वीडियो बना, कर रहे वायरल।
अभिव्यक्त का तरीका हुआ अनूठा,
व्यवहार और अहसासों के मूल्य गए बिखर।

सिसकती मानवता, सोता समाज,
शिकायत करें तो किससे और कैसे ?
तकनीक और तरक्की की दौड़ में,
इंसानियत का अर्थ ही न बदल जाए !

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