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भात

            ज्यों ज्यों बिटिया की शादी की तारीख नजदीक आ रही है, नंदिनी की नींद उड़ती जा रही है। कुछ महीने पहले ही जेठ जी बेटी की शादी हुई थी। तभी नंदिनी ने सारे रस्मों रिवाजों को आंखों में उतार लिया था। विवाह के सारे रिवाजों को उसने एक पेपर पर क्रम से लिख लिया है, उन रिवाजों से संबंधित सामानों की लिस्ट बना ली है। तैयारी पूरी कर ली है। बस, भात की प्रथा को निभवाने में उसे संकोच हो रहा है।
            भात की प्रथा काफी अर्से पहले प्रारंभ हुई थी क्योंकि पहले लड़की को समुचित शिक्षा नहीं मिलती थी और उसे अपने पिता की संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं मिलता था। इस प्रथा के बहाने लड़की को अपने बच्चे के विवाह में अपने मायके से थोड़ी मदद हो जाती थी। पिता और भाई आगे बढ़कर इस रिवाज को बखूबी निभाते थे। जेठ जी की बेटी की शादी में जेठानी जी के चारों भाई भात ले कर आए थे। कपड़े, रुपये, सोना, चांदी क्या नहीं दिया उन्होंने ! कुछ तो फिजूलखर्ची और दिखावा सामाजिक प्रतिष्ठा के पैमाने बन गए हैं।
            नंदिनी के पिता काफी वर्ष पूर्व गुजर गए और पिछले वर्ष इकलौता भाई भी एक हादसे का शिकार हो गया और चल बसा। मायके के नाम पर भाभी और दो भतीजे। बड़े भतीजे की कुछ महीने पहले ही नौकरी लगी है। छोटा भतीजा अभी पढ़ रहा है। भाभी का कई बार फोन आ गया- 'जीजी, घर के सभी सदस्यों की सूची दे देना। भात की तैयारी के साथ आपके दोनों भतीजे पहुंच जाएंगे।'
            दो दिन से नंदिनी को गुमसुम देख कर नीरज ने पूछ ही लिया- "शादी की बढ़िया तैयारी चल रही है। तुम हो पता नहीं किस चिंता में डूबी रहती हो ?"
" नीरज, भात की प्रथा पिता और भाई द्वारा निभाई जाती है। जब वे दोनों ही नहीं हैं, तो इस प्रथा का बोझ भाभी पर क्यों? आज मैं भाभी की तरफ से भात की पूरी तैयारी खुद कर के रस्म निभवा लूँ- पर इस बात के लिए भाभी तैयार नहीं होंगी और मैं भी नहीं चाहती हूँ- उनके सम्मान को ठेस पहुँचे। भतीजे के वेतन से घर चल रहा है। वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है, जो एक दिन दिखता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है। महँगाई के दौर में गृहणियाँ जानती हैं- किस मद में कटौती करके किस मद की आवश्यकता को पूरा किया जाय। कहीं तो, किसी को तो इस परिपाटी पर रोक लगानी होगी।"
" नंदिनी, तुम्हारा कहना बिल्कुल सही है। आज के समय में इन रिवाजों में मुझे कोई तथ्य नजर नहीं आता।"
तुरन्त नंदिनी ने भाभी को फोन लगाया- " भाभी, मैं आपसे भात में 501-501 रुपयों के लिफाफे लूँगी, वह भी इसी शर्त पर कि आप खुद आ कर मुझे और अपने जीजाजी को तिलक करोगी।"
            नंदिनी ने नीरज का हाथ पकड़ कर "धन्यवाद" कहा। नीरज मुस्करा दिए।

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