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मैं काला रंग


लाल, पीला, सफेद सभी रंगों का भाई हूँ, मैं काला हूँ।
यूं न देखो मुझे तल्ख नजरों से, मैं भी तो एक रंग हूँ।

भूलो ना-
तुम्हें काला टीका लगा माँ बुरी नजरों से बचाती,
काला धागा पहना तुम्हें है सुरक्षित मानती।
काले बोर्ड पर लिख अक्षर तुम्हारा जीवन संवरा,
 सफेद पन्नों पर काला अक्षर ही अद्भुत निखरा।

सोचो तो-
काले मेघा देख क्यों किसान है नाचता,
बरसने पर लहलहाती फसल देख इतराता।
झमाझम बरस कर तुम्हें तपिश से बचाता हूँ।
बहते पानी से धरती की प्यास बुझाता हूँ।

मानो ना-
काली कोयल की कुहू कुहू का रसपान करते हो,
गोरी की आंखों में देख काजल मुग्ध हो जाते हो।
जिस रंग में मिल जाता हूँ, गहरा कर देता हूँ।
जहां भी हो फीकापन, अपनी धाक जमाता हूँ।

गौर करो-
आसमां हो काला तो तारे भी लगते सुंदर,
कान्हा भी तो अपने रंग से कहलाए श्यामसुंदर।
सिर के सफेद बालों से तुम क्यों हो परेशान भला,
कर खिजाब के हवाले, बालों को करते हो काला।

विनती है-
अन्य रंगों से अलग कर, न करो भेदभाव,
तन बदन हो काला, तो  करो न दुराव।
भला, हुनर कभी रंगों में हैं बसते,
जी, हुनर से तो रंग ही हैं सजते।

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