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गर्मी ! उफ्फ्फ गर्मी !

        जल बिन यह सूनापन ,
        मुरझाती फसलें , मुरझाते चेहरे ,
        आलू , प्याज , टमाटर के बढ़ते दाम,
         थाली के घटते स्वाद ,
         दूभर हुआ खान पान |

*          *          *          *          *

          राजस्थान में है मोरों का वास ,
          खामोश नभ को देख ,
          मोर का भी बदला सुर,
          ' मेह आओ , मेह आओ ',
          करुण- क्रंदन छूता दिल को |

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                                                   आज घर में चारों तरफ शोर हो रहा है | माहौल बहुत खुशनुमा है | हो भी क्यों ना ! आज अम्मा अस्पताल से आ रही हैं | गत माह अम्मा को पीलिया हो गया था | भैय्या की शादी थी- बस बदपरहेजी हो गई और पीलिया बिगड़ गया | शादी के तुरंत बाद ही अम्मा को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा | पूरे  एक माह बाद अम्मा का घर आना सभी को अच्छा लग रहा है |                                                    मुझे अच्छी तरह याद है | एक दिन मेरी सहेली स्मिता की देखादेख मैंने अम्मा को ' दादी ' कह कर पुकार लिया | उन्होंने अनसुना कर दिया | मैं उनके पास गई और पल्ला पकड़ कर बोली -"मैं आप ही को पुकार रही थी |" वे बोली- "पर मैं तो दादी नहीं ,अम्मा हूँ |" वे हमारी ही नहीं ,मोहल्ले की अम्मा हैं -'जगत-अम्मा' हैं, उनके अम्मापन मे...

गर्मी ! गर्मी ! गर्मी !

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बोनसाई

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