पौराणिक कथाओं में पढ़ा था -
हनुमान ने पाया अमर-जीवन ,
कहीं राह चलते ,
आज मिल जाए हनुमान ,
मैं हाथ जोड़ खड़ी हूँ-
'आज हो जाओ प्रकट ,
दोहरा दो पुनः वह शैतानी ,
कुछ पल निगल जाओ सूरज को ,
नहीं है मेरा कोई स्वार्थ ,
होगा सर्वजन हिताय |
हनुमान ने पाया अमर-जीवन ,
कहीं राह चलते ,
आज मिल जाए हनुमान ,
मैं हाथ जोड़ खड़ी हूँ-
'आज हो जाओ प्रकट ,
दोहरा दो पुनः वह शैतानी ,
कुछ पल निगल जाओ सूरज को ,
नहीं है मेरा कोई स्वार्थ ,
होगा सर्वजन हिताय |
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