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पुण्य की परिभाषा -16जून -निर्जला एकादशी के उपलक्ष्य पर

                                               जेठ महीने की तपती दोपहर | बिजली का बिल भर  कर अंकित लौटा ही था | घर के बाहर के लॉन को पार करके घर में प्रवेश कर ही रहा था कि बगिया में काम करते हुए माली ने कहा -" बेटा, बहुत प्यास लगी है , मेरी बोतल में तनिक ठंडा पानी भरवा दो |" अंकित ने ज्यादा विचार न करते हुए माली के हाथ से बोतल ली और घर के अन्दर आ गया | माली चिल्लाता रहा -"बेटा , सुनो तो !"  पर अंकित घर में प्रवेश कर चुका था |
                                                 अंकित ने आवाज दे कर कहा -" माँ , माली काका की बोतल में ठंडा पानी भर दो और मुझे भी पानी पीना है | माँ , बाहर तो आग ही बरस रही है |" कमरे में सोफे पर बैठी  दादी ने देखा भी और सुना भी | जोर से चिल्ला पड़ी -" अरे तो तू उसकी बोतल ही क्यों उठा लाया ? इसे परे को रखिये ,मुआ ,बाहर नल का पानी ही पी लेता ! तू  साबुन से हाथ धो लिये |"  पता नहीं क्या-क्या बड़-बड़ करती रहीं  | अंकित सुनता रहा | थका हुआ था ,दादी से बहस करने की उसकी हिम्मत नहीं थी |
                                                    थोड़ी ही देर में अंकित के पिता शिवकुमार कमरे में आए और  बोले -"माँ , मैं आज गाँव जा रहा हूँ | वहाँ का कुछ काम हो तो बता देना |" अंकित की दादी बोली- " हाँ , निर्जला एकादशी आ रही है | मटके , पंखे दान करे जावे हैं | तू तो ऐसा करिये- गाँव के प्याऊ पर दो-तीन बड़े मटके पानी के भर कर रखवा दिए और कुछ रुपये दान भी कर देना | प्याऊ वाला आते-जाते लोगों को ठंडा पानी पिलाता रहेगा | हमें भी पुण्य मिलेगा |"
                                                       अंकित सब सुन रहा था | सोचने लगा -'भला ,पुण्य की परिभाषा क्या है ? '

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