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याचना

                                       दाताराम को दोस्त नंदराम के बीमार  होने की खबर मिली , वह उनके हालचाल लेने के लिए उसके घर की ओर मुड़ गया | रास्ते भर वह सोचता रहा कि नंदराम तो बहुत हृष्ट -पुष्ट और खुश मिजाज इंसान है , फिर बीमार कैसे हो गया | नंदराम के घर पहुँचने पर देखा - उसके सिरहाने काफी दवाइयां रखी हैं | दाताराम बहुत सहम गया | अनुमान लगाया -' काफी खर्चा हुआ होगा !' नंदराम ने बताया - " मैं अचानक मूर्छित हो गया | पूरे शरीर की जाँच हुई | डॉक्टर ने बताया - मस्तिष्क में खून का थक्का जम गया है | " दाताराम मन ही मन बुदबुदाने लगा - ' एक  बिमारी का इतना खर्चा ? '
                                       दाताराम के पास जरुरत से ज्यादा धन है , परन्तु धन-लोलुपता अब भी बरकरार है | कंजूसी उसके स्वभाव में है | ' मोटा खाओ - मोटा पहनो ' का सिद्धांत दाताराम ने अपने जीवन में ही नहीं , पूरे घर पर भी थोप रखा है | घर में प्रवेश करते ही पत्नी से बोला - " यदि मैं मूर्छित हो जाऊँ तो तुम मुझे नोटों की गड्डी सूंघा देना | डॉक्टर को बुलाने की जरुरत नहीं |"  खर्चे की आशंका के भय से ही सदा दाताराम विचलित हो जाता है | ऐसे में प्रभु की शरण में जाने के अलावा उसके पास कोई उपाय नहीं रहता |
                                       पहुँच गया मंदिर | मंदिर में काफी भीड़ थी | प्रभु से याचना की - ' प्रभु , आमदनी बढ़ाए रखना , खर्चो पर नियंत्रण रखना |  भगवान के पास रखी आरती की थाली के पास खड़ा हो गया | जेब में से मैला , थोडा फटा हुआ 10 का नोट निकाला और मुट्ठी में बंद करके थाली में डालने की कोशिश की , जिस से किसी की निगाह न पड़े | अचानक पीछे से एक बुजुर्ग ने कन्धा थपथपाया और 500 का नोट पकड़ाया | दाताराम ने उनके हाथ से नोट लेकर थाली में डाल दिया | उन के 500 के करारे नोट के बगल में पड़ा वह मैला 10 का नोट देख दाताराम लज्जित हुआ |
                                        मंदिर से बाहर निकल कर पुनः उन बुजुर्ग से आमना - सामना हुआ | दाताराम ने श्रद्दापूर्वक उन्हें नमस्कार किया | वे बोले - " बेटा , 10 का नोट निकालते समय तुम्हारी ही जेब में से 500 का नोट गिर गया था , वहीँ मैं तुम्हें सौंप रहा था | "
                                         दाताराम का सिर चकराने लगा - ' हे प्रभु , अभी तो तुम से याचना की थी , और अभी ......यह क्या हुआ ? '

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