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लो , आ गया मधुमास

बीती वे लम्बी काली रातें ,
        लो आ गया मधुमास |
देखो , इन्द्रधनुषी हुआ ,
        कुदरत का कैनवास |

नवकोपलों से सजे ,
        द्रुम डालियों के दल |
अमवा भी बोराई,
       बूढ़े वट पर चढ़ा यौवन बल |

लम्बी ख़ामोशी के बाद ,
       सुनी पक्षियों की चहचहाहट |
ठिठुरन का हुआ अंत ,
        आई गर्मियों की चुनचुनाहट |

छितराए बादलों के बीच ,
        चली ठंडी बयार |
प्रफुल्ल है आमजन ,
        ख़ुशी बढ़ाते आए त्यौहार |

प्रभु की ही इनायत है ,
        चहुँ ओर छा गया वसंत |
हम रहे सदा हँस-मिल-जुल ,
        जीवन में भी सदा रहे वसंत |

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