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पब की दुनिया

                                          कई वर्षों से अमेरिका में रह रहे सुरेखा और सुजीत सभी सुख - साधनों - सम्पदा से तराबोर हैं | फिर भी  समृद्ध जीवन के बीच कहीं एकाकीपन तो है ही , रिश्ते - नाते , सम्बन्धी अपने सभी भारत में हैं , सो दूर हो गए | एक बेटी है -उर्वशी | एक दिन सुजीत के मन में विचार आया - ' किसी कारणवश हमें भारत लौटना पड़ा , तो उर्वशी कैसे एडजस्ट हो पाएगी ? ' यही सोचते हुए उर्वशी की स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद कॉलेज के लिए भारत में ही पढ़ाना उचित समझा | दिल्ली के नामी कॉलेज में नाम लिखा कर , रहने की व्यवस्था सुचारू रूप से करके दोनों अमेरिका लौट गए | फ़ोन , व्हाट्स अप और मेल द्वारा उर्वशी से संपर्क बनाए रखा |
                                            लगभग छः माह बाद सुरेखा को बेटी को देखने की लालसा हुई और उर्वशी को बताए बिना भारत आ गई , उसके रूम पहुँच गई | देखा ,रूम के ताला लगा हुआ है | उसके मोबाईल पर संपर्क करने की कोशिश की , तो बंद मिला | अब इन्तजार करने के अलावा उसके पास कोई चारा न था | सुबह चार बजे उर्वशी लौटी | उर्वशी की स्थिति देख सुरेखा स्तब्ध रह गई | छोटे कपड़ों और शराब के नशे में वह लड़खड़ा रही थी | अपनी माँ को देख कर मुस्कराई - " हाय मॉम , आप अचानक ! आप मैसेज देती तो मैं आपको लेने एअरपोर्ट आ जाती | " इस समय सुरेखा ने कुछ कहना मुनासिब न समझा | घर में घुसते ही उर्वशी तो बेसुध सो गई , पर सुरेखा की तो नींद ही उड़ चुकी थी |
                                            सुबह आठ बजे उर्वशी का नशा उतर चुका था , माँ से गले मिली | पास बैठी तो सुरेखा ने पूछ ही लिया -" तुम घर से कितने बजे निकली थी और कहाँ गई थी ? "
उर्वशी - " मॉम , मैं एक फ्रेंड के साथ पब गई थी , हर वीकेंड जाती हूँ | "
सुरेखा - " क्या ? उर्वशी तुम अमेरिका में नहीं , भारत में हो | यहाँ तुम्हे सहेली भी तुम जैसी ही मिली | तुम्हें पैसा अपनी जरुरत से पहले मिला क्योंकि हमने सोचा नई जगह , नए माहौल में तुम्हें किसी तरह की परेशानी न हो | परन्तु तुमने तो हमारी दी हुई सहुलियत का गलत उपयोग किया | बेटा , पब की दुनिया मात्र बनावट और दिखावे की दुनिया है | छोटे कपड़ों में रहना , शराब के नशे में रहना - पैसे और जिस्म की नुमाइश ही तो है | यदि तुम्हारे साथ कुछ अनहोनी होती है , तो क्या तुम अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकोगी ? क्या इतनी सशक्त हो ? अरे , नशे तुम स्वयं को नहीं संभाल पाती हो , तो किसी की ज्यादती का क्या विरोध कर सकोगी ? बेटा , उस समय मदद के लिए तिनके का सहारा भी नहीं मिलेगा | हाँ , चिंगारी से आग जरुर फैलेगी | तुम्हे भारतीय सभ्यता , तहजीब , संस्कार को समझना चाहिए | जिस समाज में हम रहते हैं उसके प्रति हमारा फर्ज भी होता है | तुम्हारे कॉलेज में कई स्टूडेंट्सऐसे भी होंगे , जो मुश्किल से फीस भर पाते होंगे | और तुम ? तुम्हारा इस तरह पैसा बर्बाद करना - कोई सभ्याचार तो नहीं !
                                            उर्वशी की आँखों से ग्लानि साफ़ झलक रही थी | सुरेखा संतुष्ट थी कि समय रहते बेटी को संभाल लिया |

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